इस शहर की अब यही तस्वीर आती है नजर-रमेश सिंघानिया, छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध सजलकर रमेश सिंघानिया ने किया वर्चुअल काव्य पाठ, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकारों में गिनती होती है सिंघानिया जी की


इस शहर की अब यही तस्वीर आती है नजर-रमेश सिंघानिया, छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध सजलकर रमेश सिंघानिया ने किया वर्चुअल काव्य पाठ
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती- 9 मार्च सोमवार को सायं 4.00 बजे अखिल भारतीय सजल सर्जना समिति की जबलपुर इकाई द्वारा गूगल मीट पर सजल काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सजल गौरव और सजल भूषण उपाधि से विभूषित बाराद्वार के सुप्रसिद्ध सजलकार रमेश सिंघानिया ने भी काव्य पठन किया। शासन की दुरावस्था पर प्रकाश डालते हुए उनकी कविता की दो पंक्तियाॅं इस प्रकार हैं “इस शहर की अब यही तस्वीर आती है नजर। हैं बहुत गड्ढे सड़क में, बजबजाती नालियाॅं।।” काव्य गोष्ठी का प्रारंभ श्रीमती गायत्री चौबे द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। गोष्ठी में दिल्ली, मुंबई, जबलपुर, उज्जैन, सिवनी, मनेंद्रगढ़, मथुरा,बिलासपुर, रामपुर, इंदौर, लखनऊ आदि स्थानों से 21 कवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सजल विधा के प्रवर्तक मथुरा निवासी अनिल गहलौत ने की। मुख्य अतिथि मथुरा के ही सुप्रसिद्ध सजलकार इंजिनियर संतोष सिंह थे। उल्लेखनीय है कि गजल की समकक्ष सजल नाम की यह विधा जिसका जन्म 5 सितंबर 2016 में मथुरा में हुआ है जो सामान्य रूप से हिंदी भाषा के ही शब्दों और व्याकरण पर आधारित है दिनों-दिन लोकप्रिय होती जा रही है और इसे लिखने वाले कवियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।। सजल के अभी तक 250 से अधिक एकल संग्रह और इससे अधिक साझा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।



