दिल्ली के लाल किला धमाके में बड़ा खुलासा, विस्फोट के प्रभाव को शक्तिशाली बनाने माईनिंग में उपयोग होने वाले अमोनियम नाइट्रेट TATP का हुआ था उपयोग


दिल्ली के लाल किला धमाके में बड़ा खुलासा, माईनिंग में उपयोग होने वाले अमोनियम नाइट्रेट TATP का हुआ था उपयोग
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ति-विगत दिनों दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियो ने बड़ा खुलासा किया है,दिल्ली के लाल किला के बाहर हुए विस्फोट को और घातक बनाने के लिए पहली बार ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) का इस्तेमाल किया गया था। यह तथ्य मामले की फोरेंसिक जांच में समाने आया है। फोरेंसिक सूत्रों के अनुसार आत्मघाती हमला करने वाले आतंकी मोहम्मद उमर ने धमाके का प्रभाव बढ़ाने के लिए अमोनियम नाइट्रेट के साथ टीएटीपी का इस्तेमाल किया था।बता दें कि टीएटीपी का इस्तेमाल मुख्य रूप से माइनिंग के लिए किया जाता है,फोरेंसिक सूत्रों के अनुसार विस्फोट की तीव्रता व प्रभाव को देखते हुए इसमें विस्फोटकों की मात्रा दो से तीन किलोग्राम थी। इसमें टीएटीपी की मात्रा कम और अमोनियम नाइट्रेट की मात्रा अधिक थी।
आतंकी उमर द्वारा इस्तेमाल की गई आइ-20 कार से लेकर विस्फोट की चपेट में आए विभिन्न वाहनों से 40 नमूने उठाए गए थे। इस पूरे मामले की जांच रोहिणी स्थित दिल्ली फोरेंसिक लैब कर रही है। साथ में केंद्रीय फोरेंसिक टीमें भी जांच में सहयोग कर रही हैं।विभिन्न फोरेंसिक एजेंसी के जांच में शामिल होने के कारण मामले की जांच रिपोर्ट तैयार होने में अभी और वक्त लग सकता है। अभी तक फोरेंसिक की जांच रिपोर्ट फाइनल नहीं हो सकी है। उम्मीद है आने वाले दिनों में फोरेंसिक टीम अपनी जांच रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप देगी।फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार टीएटीपी एक अत्यधिक अस्थिर विस्फोटक है, जोकि हल्के घर्षण, दबाव, या तापमान बढ़ने से भी सक्रिय हो सकता है। यह आतंकवादियों के लिए एक खतरनाक विकल्प है, क्योंकि यह बिना किसी अतिरिक्त ट्रिगरिंग उपकरण के भी विस्फोट कर सकता है। टीएटीपी अपनी शक्तिशाली शाकवेव्स के लिए जाना जाता है। आसानी से इसका पता न लगने के कारण ही अक्सर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी) में इसका इस्तेमाल किया जाता है


