छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष महंत ने महामहिम राज्यपाल को लिखा पत्र. कहा पीएससी मामले में विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर राजभवन करें हस्तक्षेप

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष महंत ने महामहिम राज्यपाल को लिखा पत्र. कहा पीएससी मामले में विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर राजभवन करें हस्तक्षेप

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश के युवाओं और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल एवं आयोग प्रबंधन से दो प्रमुख मांगों पर त्वरित निर्णय लेने पत्र लिखा है। मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए अपर्याप्त समय और परीक्षा शुल्क वापसी की जटिल प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ​डॉ. महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से ही यह स्वस्थ परंपरा रही है कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने और मुख्य परीक्षा के आयोजन के बीच कम से कम 100 दिनों का अंतराल दिया जाता था। यह समय अभ्यर्थियों को विस्तृत पाठ्यक्रम की तैयारी और उत्तर लेखन के अभ्यास के लिए नितांत आवश्यक है। ​इस वर्ष 25 मार्च को परिणाम जारी होने के बाद मुख्य परीक्षा 16 मई से निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए मात्र 51 दिन का समय मिल रहा है, जो कि नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। सरकार को युवाओं के मानसिक दबाव को समझते हुए इस समय सीमा को पूर्व की भांति 100 दिन से अधिक करना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने शुल्क वापसी प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव ​परीक्षा शुल्क वापसी की वर्तमान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान में अभ्यर्थियों से दोबारा बैंक जानकारी मांगी जाती है, जिससे कई अभ्यर्थी तकनीकी कारणों या समय सीमा के अभाव में अपनी राशि वापस नहीं पा पाते। होना यह चाहिए आवेदन के समय जिस बैंक खाते से शुल्क का भुगतान किया गया है, परीक्षा में उपस्थित होने पर उसी खाते में स्वत, शुल्क वापस किया जाना चाहिए। इससे न केवल प्रक्रिया पारदर्शी होगी, बल्कि हजारों युवाओं को अनावश्यक ऑनलाइन औपचारिकता से मुक्ति मिलेगी।​डॉ. महंत ने जोर देकर कहा कि लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसकी कार्यप्रणाली युवाओं में विश्वास जगाने वाली होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और आयोग के अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि प्रचलित परंपराओं को समाप्त कर युवाओं के भविष्य को संकट में न डालें। प्रदेश का युवा ही छत्तीसगढ़ का भविष्य है। उनके साथ न्याय करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। हम मांग करते हैं कि मुख्य परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाई जाए और शुल्क वापसी की प्रक्रिया को सरलतम बनाया जाए

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