केंद्र सरकार की समूह दुर्घटना बीमा योजना से महेंद्र की पत्नी शारदा को मिली 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि




केंद्र सरकार की समूह दुर्घटना बीमा योजना से महेंद्र की पत्नी शारदा को मिली 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत संचालित समूह दुर्घटना बीमा योजना से दुर्घटना में मृत मछुआरे के परिवार को आर्थिक संबल मिला है। योजना के तहत जय महामाया दाई मछुआ सहकारी समिति मर्यादित, हसौद के सक्रिय सदस्य स्वर्गीय श्री महेन्द्र श्रीवास के नामित उत्तराधिकारी उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शारदा श्रीवास को 5 लाख रुपये की बीमा सहायता राशि प्रदान की गई है।उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय श्री महेन्द्र श्रीवास की मृत्यु को विद्युत प्रवाह की चपेट में आने से हुई थी। घटना के पश्चात नियमानुसार दुर्घटना बीमा दावा प्रकरण तैयार कर मछली पालन संचालनालय, छत्तीसगढ़ के माध्यम से राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) को प्रेषित किया गया। दावा प्रकरण के स्वीकृत होने के उपरांत उनके नामित उत्तराधिकारी श्रीमती शारदा श्रीवास के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 5 लाख रुपये की बीमा सहायता राशि जमा की गई। इस योजना के माध्यम से प्राप्त आर्थिक सहायता से स्वर्गीय श्री महेन्द्र श्रीवास के परिवार को विपरीत परिस्थितियों में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल मिला है। प्रकरण के सफल निराकरण में सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग द्वारा राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड तथा संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया है।सहायक संचालक मछली पालन, जिला सक्ती ने बताया कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत पात्र 18 से 70 वर्ष आयु वर्ग के मछुआरों को निःशुल्क दुर्घटना बीमा का लाभ प्रदान किया जाता है। योजना के तहत दुर्घटना के कारण मृत्यु होने की स्थिति में नामित उत्तराधिकारी को 5 लाख रुपये तथा स्थायी अपंगता की स्थिति में शारीरिक क्षति के अनुरूप अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है। उन्होंने जिले के सभी पात्र मछुआरों एवं मत्स्य पालकों से अपील की है कि वे निःशुल्क समूह दुर्घटना बीमा योजना से जुड़कर इसका अधिकतम लाभ उठाएं। योजना से संबंधित अधिक जानकारी एवं पंजीयन के लिए जिला मत्स्य कार्यालय अथवा विकासखंड स्तर पर कार्यरत मत्स्य अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है।







