शक्ति जिले की कलेक्टर जयश्री के निर्देशन एवं सीएमएचओ डॉक्टर पूजा अग्रवाल के मार्गदर्शन में ‘राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा’ का शुभारंभ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती में 7 मरीजों के सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन के साथ अभियान की हुई शुरुआत

शक्ति जिले की कलेक्टर जयश्री के निर्देशन एवं सीएमएचओ डॉक्टर पूजा अग्रवाल के मार्गदर्शन में 'राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा' का शुभारंभ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती में 7 मरीजों के सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन के साथ अभियान की हुई शुरुआत kshititech

शक्ति जिले की कलेक्टर जयश्री के निर्देशन एवं सीएमएचओ डॉक्टर पूजा अग्रवाल के मार्गदर्शन में ‘राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा’ का शुभारंभ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती में 7 मरीजों के सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन के साथ अभियान की हुई शुरुआत

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

​सक्ती -​राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत सक्ती जिले में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा’ का विधिवत शुभारंभ किया गया। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती जय श्री जैन के निर्देशानुसार तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन मे अभियान की शुरुआत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती में 7 मोतियाबिंद मरीजों के सफल ऑपरेशन के साथ हुई। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती जयश्री जैन के निर्देशन में जिले मे आमजनों के बेहतर स्वास्थ्य सहित जन-जागरूकता अभियानों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में जिले के समस्त सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ नेत्र सहायक अधिकारियों द्वारा विद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को नेत्रदान के महत्व, आवश्यकता और इसके प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने की जानकारी दी जा रही है।
​जिला नोडल अधिकारी (अंधत्व कार्यक्रम) एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवांगी रंजनी ने बताया कि देश में लाखों लोग कॉर्निया में धुंधलापन या खराबी के कारण दृष्टिहीनता का सामना कर रहे हैं। चूंकि कॉर्निया का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है, इसलिए कॉर्निया प्रत्यारोपण ही ऐसे मरीजों के जीवन में रोशनी वापस लाने का एकमात्र साधन है। नेत्रदान हमेशा मरणोपरांत ही संभव होता है और मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्र सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। भारत शासन के नए नियमानुसार अब पहले से घोषणा पत्र भरने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है; मृतक के वारिसों की सहमति से भी मरणोपरांत नेत्रदान कराया जा सकता है। चिकित्सकीय मापदंडों के अनुसार संक्रामक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का नेत्रदान स्वीकार नहीं किया जाता है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से अपील की है कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो जरूरतमंदों की जिंदगी संवार सकता है, इसलिए इस सबसे बड़े मानवीय संकल्प में अधिक से अधिक लोग अपनी सहभागिता निभाएं।

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