शक्ति जिले में किसानों को मिल रही बेहतर सुविधाएं- कृषि विभाग द्वारा 29 मई से 12 जून तक चलेगा विकसित कृषि संकल्प अभियान, जिले की समितियो में किसानों के लिए खाद-बीज के वितरण का कार्यक्रम हुआ शुरू, कृषि के मामले में उन्नत एवं विकसित जिला है शक्ति, उप संचालक कृषि शक्ति के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम सजग, अभी तक का होगा सबसे बड़ा अभियान, शक्ति जिले में लगेंगे 76 शिविर



शक्ति जिले में किसानों को मिल रही बेहतर सुविधाएं- कृषि विभाग द्वारा 29 मई से 12 जून तक चलेगा विकसित कृषि संकल्प अभियान, जिले की समितियो में किसानों के लिए खाद-बीज के वितरण का कार्यक्रम हुआ शुरू, कृषि के मामले में उन्नत एवं विकसित जिला है शक्ति, उप संचालक कृषि शक्ति के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम सजग
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती- शक्ति जिले में कृषि विभाग के द्वारा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा रहा है, शक्ति जिला कृषि के मामले में उन्नत एवं विकसित जिला है, तो वहीं कृषि विभाग के अधिकारी- कर्मचारी भी शक्ति जिले के आईएएस कलेक्टर अमृत विकास टोपनो के दिशा निर्देशन में सजग एवं सक्रिय हैं, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय नई दिल्ली के निर्देशानुसार 29 मई से 12 जून तक राज्य के सभी विकासखण्डों में विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन किया जावेगा। उपरोक्त जानकारी देते हुए जिला कृषि विभाग शक्ति के उपसंचालक शशांक शिंदे ने बताया कि संचालनालय कृषि रायपुर के द्वारा राज्य के सभी जिलों के कृषि एवं संवर्गीय विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में दिए गए निर्देश अनुसार, यह अभियान राष्ट्रीय स्तर का अभियान खरीफ मौसम की पूर्व तैयारी को सशक्त बनाने, किसानों को आधुनिक व वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और खेतों में हो रहे नवाचारों को पहचान कर अनुसंधान की दिशा तय करने के लिए शुरू किया गया है।सक्ती जिला में, इस अभियान के सफल संचालन के लिए कृषि एवं संबंधित विभाग जैसे उद्यान, पशुपालन, मछलीपालन के जिला एवं विकासखण्ड स्तर के अधिकारियों तथा कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों की 3 टीम गठित की गई है ये टीम प्रतिदिन 2 ग्राम पंचायतों में पहुंचकर किसानों के साथ वैज्ञानिक परिचर्चा करेंगी साथ ही कृषक पाठशाला के माध्यम से, किसानों को धान की सीधी बुआई, ड्रोन तकनीक का उपयोग, प्राकृतिक खेती योजना के बारे में, बीजों की नवीन किस्में, संतुलित उर्वरक उपयोग, संतुलित कीटनाशक उपयोग, पशुओं की मौसमी बिमारियों एवं उपचार, उद्यानिकी फसलों के बारे में विस्तृत रूप से परिचर्चा की जावेगी साथ ही कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन, मछलीपालन विभाग की प्रमुख राज्य एवं केन्द्रिय योजना के बारे में जानकारी साझा की जावेगी। शिविर में गाम पंचायत एवं विकासखण्ड के प्रगतिशील कृषकों को भी उनके नवाचार के बारे में बताने हेतु आंमत्रित किया जाऐगा। शिविर में, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के छुटे हुए हितग्राहियों का मालब, आधार सीडिंग एवं भूमि सीडिंग कार्य भी किया जायेगा, ताकि आगामी 20 वीं किस्त से लाभान्वित किया जा सके,स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में, अभियान की गरिमामय संपन्नता के निर्देश दिए गए है। इस प्रकार दिनांक 29 मई से 12 जून तक जिले में ब्लाक सक्ती में 18 शिविर, मालखरौदा में 20 शिविर, डभरा में 20 शिविर तथा जैजैपुर में 18 शिविर कुल 76 शिविरों का आयोजन किया जावेगा।
सक्ती जिले में समितियों के माध्यम से खाद-बीज का वितरण चालू, कृषि उपसंचालक शशांक शिंदे ने दी जानकारी
सक्ती-जिला-सक्ती में खरीफ मौसम के लिए खेती-किसानी की तैयारी चालू हो गयी है। सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से जिले के किसानों को खेती किसानी के लिए जरूरी खाद-बीज का वितरण किफायती दाम पर अग्रिम खाद-बीज उठाव योजना के अंतर्गत, प्रारंभकर दिया गया है।गौरतलब है कि, जिला सक्ती एक कृषि प्रधान जिला है जिसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार-आगामी खरीफ मौसम में, धान फसल है। धान फसल का रकबा जिले में 113818 हेक्टेयर है। धान की अच्छी पैदावार के लिए, पानी, दवा के साथ खाद एवं उन्नत किस्म के बीज का समय पर उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखकर, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग एवं मार्कफेड के समन्वय से जिले के किसानों को, समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए जिले के सभी 95 समितियों में कुल 18096.30 क्विटल बीज का भण्डारण कराया गया है। जिसमें मुख्य रूप से धान के किस्म स्वर्णा सब-1. MTU-1318, MTU-1156, MTU-1239 है। जहां एक ओर, जिले में सर्वाधिक प्रचलित धान किस्म स्वर्णा है, जिसका रेट 1065 रूपये प्रति बोरी है। लगातार एक ही किस्म लेने से किसानो को कीड़ा ज्यादा लगने, खड़ी फसल के गिर जाने से कटाई में समस्या आदि अनेक समस्याएँ, स्वर्णा किस्म में 2-3 वर्षों से आ रही है। इसी समस्याओं को ध्यान में रखकर कृषि वैज्ञानिकों ने धान की 6 नई किस्में बाजार में उतारी है जो कम समय, कम पानी में, ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम है।MTU-1318- MTU-1318, एक धान की नयी किस्म है जो सिंचित परिस्थितियों में, बहरा खेतों के लिए उपयुक्त किस्म है। इसकी अवधि 140 से 150 दिनों की है। यह एक लंबी अवधि, अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्म है। यह फसल अधिक पानी, तेज हवा में गिरती नहीं है। यह स्वर्णा किस्म से गरहून है अर्थात् 10-15 दिन देर से पकती है और उत्पादन भी ज्यादा अर्थात 55-60 क्विटल प्रति हेक्टेयर देती है,MTU-1156-MTU-1156, धान की मध्यम अवधि की किस्म है। यह 125-130 दिन में तैयार होती है। इसे तरंगिनी भी बोला जाता है। यह खरीफ एवं रबी दोनों मौसम में उगाया जा सकता है। यह प्रति हे. 70.00 क्विटल उपज दे सकती है।छत्तीसगढ़ देवभोग-इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से निकली यह धान की किस्म 135-145 दिन में पककर तैयार होती है। सिंचित आवस्था में औसम उत्पादन 40-45 क्विटल प्रति हेक्टेयर आता है। यह मध्यम पतला दाना, सुगंधित किस्म है,विकम टी.सी.आर.-यह इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से जारी मध्यम अवधि 120-125 दिन की बौनी किस्म है। दाना, लंबा, पतला, मुरमुरा बनाने के लिए उपयुक्त किस्म है। औसत उत्पादन 55-60 क्विटल प्रति हेक्टेयर है।छत्तीसगढ़ धान 1919-यह मध्यम पतला दाना, मध्यम भूमि (मटासी, डोरसा) के लिए उपयुक्त, यह किस्म 130-135 दिन में पककर तैयार होती है। औसत उत्पादन 53-60 क्विटल प्रति हेक्टेयर आती है।MTU-1239- मध्यम पतला दाना, सूखा सहनशील, मध्यम ऊँचाई वाला यह किस्म 140-145 दिन में पककर तैयार होता है। यह भूरा माहों और बैक्टेरियल लीफ ब्लाइट के लिए मध्यम सहनशील होता है। इसका औसत उत्पादकता 55-२० क्विटल प्रति हेक्टेयर है। देवभोग-इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से निकली यह धान की किस्म 135-145 दिन में पककर तैयार होती है। सिंचित आवस्था में औसम उत्पादन 40-45 क्विटल प्रति हेक्टेयर आता है। यह मध्यम पतला दाना, सुगंधित किस्म है,विकम टी.सी.आर.-यह इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से जारी मध्यम अवधि 120-125 दिन की बौनी किस्म है। दाना, लंबा, पतला, मुरमुरा बनाने के लिए उपयुक्त किस्म है। औसत उत्पादन 55-60 क्विटल प्रति हेक्टेयर है।छत्तीसगढ़ धान 1919-यह मध्यम पतला दाना, मध्यम भूमि (मटासी, डोरसा) के लिए उपयुक्त, यह किस्म 130-135 दिन में पककर तैयार होती है। औसत उत्पादन 53-60 क्विटल प्रति हेक्टेयर आती है।MTU-1239- मध्यम पतला दाना, सूखा सहनशील, मध्यम ऊँचाई वाला यह किस्म 140-145 दिन में पककर तैयार होता है। यह भूरा माहों और बैक्टेरियल लीफ ब्लाइट के लिए मध्यम सहनशील होता है। इसका औसत उत्पादकता 55-60 क्विटल प्रति हेक्टेयर है।उपरोक्त धान की नवीन किस्में जिले में बीज निगम के पास उपलब्ध है। इस वर्ष प्रमाणित मोटा धान 3550 रूपये प्रति क्विटल, पतला धान 4030 रूपये प्रति क्विटल एवं सुगंधित धान 4650 रूपये प्रति क्विटल निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार जिला सक्ती में यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी. के. 12:32:16 सिंगल सुपर फास्फेट, एम.ओ.पी. (पोटास), काम्पेक्स 20:20:0:13, एस.एस.पी. (राखड़ खाद) दानेदार एवं एस.एस.पी. (पाउडर) में उपलब्ध है।इस वर्ष कृषक / समिति दर यूरिया 266.50 रूपये, डी.ए.पी.-1350 रूपये, एन.पी. के.-12:32:16-1720 रूपये, पोटाश-1535 एवं काम्पेक्स 20:20:0:13-1300 रूपये रूपये प्रति बोरी निर्धारित की गई है।


