नकली करेंसी को लेकर बड़ा खुलासा- नेपाल से बिहार के रास्ते जम्मू पहुंचे जाली नोट. देश में चल रहा है नकली नोटों का बड़ा साम्राज्य. 10 लाख का लोन लेकर 30 लाख की जाली करंसी देने का वादा किया था नकली नोटों के सौदागरों ने




नकली करेंसी को लेकर बड़ा खुलासा- नेपाल से बिहार के रास्ते जम्मू पहुंचे जाली नोट. देश में चल रहा है नकली नोटों का बड़ा साम्राज्य
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -अरनिया पुलिस की ओर से कुछ दिन पहले जाली भारतीय करेंसी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार दोनों ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर जाली करेंसी के संभावित नेटवर्क, उससे जुड़े लोगों और क्षेत्र में नकली नोट पहुंचने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का सुराग सेना की 9 कोर इंटेलिजेंस बटालियन से मिले इनपुट के बाद लगा था। खुफिया एजेंसी 9 कोर इंटेलिजेंस बटालियन को अपने स्तर पर पुख्ता सूचना मिलने के बाद यह जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ साझा की गई, जिसके आधार पर अरनिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था।
सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान विलियम खोखर और रघुवीर ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी तरसेम है, जबकि उसके दो साथी रवि और संजीव भी इस मामले में शामिल हैं। तीनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पूछताछ में दोनों ने दावा किया कि करीब 50 लाख की जाली भारतीय करेंसी क्षेत्र में लाई गई है और मुख्य आरोपी के पकड़े जाने के बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा। सूत्रों के मुताबिक विलियम खोखर ने पूछताछ में बताया कि उसने जेके बैंक से करीब 10 लाख का लोन लिया था। इसी दौरान तरसेम ने उसे 10 लाख के बदले 30 लाख की जाली करेंसी देने का लालच दिया। बताया गया कि वह तरसेम के साथ दिल्ली भी गया, जहां से करीब 6.50 लाख की जाली करेंसी लाई गई। हालांकि नोट देखने के बाद उसे संदेह हुआ कि वे नकली हैं और पकड़े जाने के डर से उसने अधिकांश नोट वापस कर दिए। पूछताछ में यह भी सामने आया कि विलियम के पास पांच जाली नोट रह गए थे। इनमें से तीन उसने अपने एक रिश्तेदार को दे दिए। सूत्रों के अनुसार वह रिश्तेदार इसी वर्ष मार्च में जम्मू एयरपोर्ट पर उन नोटों के साथ पकड़ा गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद विलियम ने अपने पास बचे दो नोट फाड़ दिए। उसने यह भी बताया कि वह लगातार तरसेम से अपने पैसे वापस मांग रहा था, जिसके बाद उसे करीब 5 लाख वापस मिले, जबकि 5 लाख अभी भी बकाया बताए जा रहे हैं। वहीं रघुवीर ने पूछताछ में बताया कि उसने अपनी जमीन का एक हिस्सा करीब 6.15 लाख में बेचा था। तरसेम ने उसे 15 लाख की जाली करेंसी देने का भरोसा दिया था, लेकिन उसे अब तक कोई नकली नोट नहीं मिला। सूत्रों का यह भी कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि मुख्य आरोपी तरसेम के पास अभी भी बड़ी मात्रा में जाली करेंसी मौजूद हो सकती है। यहां तक कि उसके पास जाली नोट तैयार करने वाली मशीन होने की भी बात सामने आई है। हालांकि पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान दोनों व्यक्तियों के मोबाइल फोन भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि उनके संपर्कों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा सके। चूंकि उनके पास से कोई जाली करेंसी बरामद नहीं हुई, इसलिए पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।वहीं पुलिस की जांच अब मुख्य रूप से फरार तरसेम, रवि और संजीव पर केंद्रित है। पुलिस ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे जाली करेंसी नेटवर्क, उसके स्रोत और क्षेत्र में पहुंची नकली मुद्रा की वास्तविक मात्रा का खुलासा हो सकेगा। बताया जा रहा है कि इस करेंसी को नेपाल के रास्ते बिहार लाया गया।







