वेदांता ग्रुप के संस्थापक अनिल अग्रवाल ने कहा-मेरे लिए भोजन सिर्फ़ भूख से राहत पाने की चीज़ नहीं है, एक मेमोरी भी है. नंद घर और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के माध्यम से किये जा रहे कार्यों की जानकारी भी साझा की अनिल जी ने




वेदांता ग्रुप के संस्थापक अनिल अग्रवाल ने कहा-मेरे लिए भोजन सिर्फ़ भूख से राहत पाने की चीज़ नहीं है, एक memory भी है
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -वेदांता ग्रुप के संस्थापक अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने अतीत के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन दिनों की याद, जब मैं न्यू यॉर्क में अकेला रहता था और एक मेटल वायर कंपनी को ख़रीदने की कोशिश में लगा था। उस वक़्त मेरे लिए एक-एक डॉलर मायने रखता था। इसलिए ज़्यादातर दिन मैं बिल्डिंग के बाहर खड़े ठेले के एक सैंडविच या माँ और किरन के बनाए पराठे खाकर ही गुज़ारा कर लेता था। और कई रातें तो आधे पेट ही सोना पड़ता था।
अनिल जी ने कहा कि आप सब जानते हैं कि मैं दिल से खाने का शौक़ीन हूँ, और शायद इसीलिए वो दिन आज भी मुझे नहीं भूलते। क्योंकि उसी भूख ने मुझे सिखाया कि ज़िंदगी में वो कौनसी चीज़ें हैं, जो सचमुच बहुत क़ीमती हैं – जैसे एक दोस्त जो आपके साथ अपनी थाली बाँट ले, वो पड़ोसी जो परदेस में आपके घर कोई देसी डिश पहुँचा दे, या कोई वॉलिंटियर जो आपको गरम-गरम खाना परोस दे… और हाँ, चैन की नींद।यही वजह है कि नंद घर और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन में हम जो काम कर रहे हैं, वो मेरे दिल के बेहद क़रीब है। इसके ज़रिए हमारी यही कोशिश है कि कोई बच्चा, कोई परिवार, कोई गाँव कभी भूखे पेट न सोए।अगर आपने भी कभी भूख को क़रीब से जाना है, तो उस याद को अपनी ताक़त बनाइए। और जब भी मौक़ा मिले, इस नेशनल न्यूट्रिशन वीक किसी और की भूख मिटाने की वजह बनिए







