अतुल कृष्ण जी ने कहा– मोबाइल घर, परिवारों को तोड़ने का कर रहा कार्य, सक्ति के दुबलधनिया परिवार की श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ी भीड़, अतुल कृष्ण जी भारद्वाज ने कहा- भगवान किसी को मारते नहीं, बल्कि तारते हैं,आज भी घरों में जीवित है पुतनाये, आयोजक परिवार के 20 शहरों के सदस्य जुटे हैं कथा कार्यक्रम को सफल बनाने में





अतुल कृष्ण जी ने कहा– मोबाइल घर, परिवारों को तोड़ने का कर रहा कार्य, सक्ति के दुबलधनिया परिवार की श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ी भीड़, अतुल कृष्ण जी भारद्वाज ने कहा- भगवान किसी को मारते नहीं, बल्कि तारते हैं,आज भी घरों में जीवित है पुतनाये
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ति- शक्ति के प्रतिष्ठित दुबलधनिया परिवार की चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन 21 सितंबर को व्यासपीठ पर विराजमान होकर सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य अतुल कृष्ण जी भारद्वाज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ वेदों की प्रेरणा एवं ऐतिहासिक प्रसंग पर आधारित है, तथा राक्षसी पूतना पर कहा है कि आज भी पुतनाये जीवित हैं, कथा व्यास आचार्य जी ने कहा कि भगवान किसी को मारते नहीं, बल्कि तारते हैं, एवं वे राक्षसों का नाश कर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, यदि अविद्या घर परिवार में आ जाए तो घर में कलह एवं शांति का वातावरण हो जाता है
अर्थात पूतना रूपी राक्षसी मोबाइल एवं विभिन्न माध्यम से प्रत्येक घर परिवार में पहुंच चुकी है,एवं परिवार को तोड़ने का कार्य कर रही है, जिसका प्रभाव पूरे जीवन और समाज में पड़ रहा है, आज पूतना रूपी इस महामारी से सावधान रहा जाए, हमें ध्यान रखना होगा कि हम अच्छी बातें सुन अच्छी बातें ग्रहण करें एवं भोजन को हमें झूठा नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि वह शरीर के काम आता है, आचार्य जी ने कहा कि व्यास जी ने वासुदेव एवं नंद बाबा के मिलन के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता वही है जो मित्र के कष्ट को सुनकर उसे अपना कष्ट मानकर दूर करने का प्रयत्न करें, व्यक्तिगत कष्ट को मित्र के सामने कभी भी चर्चा नहीं करनी चाहिए कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य जिस भाव से भगवान का सुमिरन करता है भगवान इस भाव से उसे अपने हृदय में बसा लेते हैं, भगवान केवल भाव देखते हैं महाराज जी ने भगवान के बाल स्वरूप की लीला पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि बाल स्वरूप की पूजा एवं सेवा पूरी तरह से निस्वार्थ भाव से होती है, और हमें किसी तरह की अपेक्षा नहीं होती कथा के अंत में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं माखन चोरी के प्रसंग को अति मार्मिक ढंग से श्रोताओं के सामने प्रस्तुत किया गया इस दौरान हजारों की संख्या में धर्म प्रेमी मौजूद थे
तथा श्री भागवत कथा को सफल बनाने में दुबलधनिया परिवार के सभी सदस्य जुटे हुए हैं एवं दूर-दूर के विभिन्न शहरों से परिवार के रिश्तेदार भी कथा श्रवण करने आ रहे हैं एवं आयोजक परिवार द्वारा कथा श्रवण की बहुत ही सुंदर व्यवस्था की गई है


