करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की करती हैं कामना. सबसे कठिन व्रत में शामिल है करवा चौथ- श्रीमती उषा केडिया मैसूर कर्नाटक। उषा जी ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से करवा चौथ के महत्व पर डाला प्रकाश. साहित्य मधुशाला की संस्थापक भी है उषा जी





करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की करती हैं कामना. सबसे कठिन व्रत में शामिल है करवा चौथ- श्रीमती उषा केडिया मैसूर कर्नाटक। उषा जी ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से करवा चौथ के महत्व पर डाला प्रकाश
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -करवा चौथ हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला (बिना जल और अन्न के) व्रत रखती हैं।यह व्रत आज 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार को पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है एवं
शाम 05:38 बजे से शाम 06:55 बजे तक इसकी पूजा का कार्यक्रम होगा साथ ही चन्द्रोदय का समय: रात लगभग 08:10 बजे से 08:16 बजे के बीच संभावित है उपरोक्त जानकारी देते हुए देश की प्रसिद्ध साहित्यकार समाजसेवीका एवं साहित्य मधुशाला की संस्थापक श्रीमती उषा केडिया मैसूर कर्नाटक ने देते हुए बताया कि इस व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले (भोर में) ‘सरगी’ खाकर होती है, जिसे आमतौर पर सास अपनी बहू को देती हैं।एवं महिलाएं इस दिन पारंपरिक लाल या अन्य शुभ रंग के वस्त्र पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं। शाम के समय शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और करवा माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान व्रत कथा सुनी जाती है।एवं रात को चाँद निकलने के बाद, छलनी से चाँद को देखकर और पति की पूजा करके उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद पति के हाथों जल और मिष्ठान ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है। श्रीमती उषा केडिया ने साहित्य मधुशाला परिवार की ओर से समस्त देशवासियों को करवा चौथ की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अपनी पंक्तियों के माध्यम से इसके महत्व पर प्रकाश डाला
करवाचौथ सदा साथ, सदा सुहाग
मिले हैं हम इस जहाँ में, अब तू ही मेरा जहाँ है, तुम संग ही मुकम्मल मेरा जहां है
बत्त जीवनसाथी तुम आए मेरे जीवन में, बन हम राहीं चलते हो संग-संग में !
लड़खड़ाते जब कदम, दामन थाम लेते हो, दबे पाँव की आहट जाने कैसे पहचान लेते हो !
शिकवे-शिकायत की चलती भीनी-भीनी नोक झोंक, लगतीं पायल की रुनझुन-सी आवाज़ है!
कभीं राँझा, कभी मजने, कभी सीरी हो, तुम ही तो मेरे जीवन का संगीत हो!
चाँद के संग चांदनी आई, आज फिर करवाचौथ आई !
करे सुहागिन पूजन तेरा, अमर रहे सुहाग मेरा, जन्म-जन्म बना रहे साथ हमारा !
हर साल यूँ हीं करवाचौथ माता, तू आना, हर घर में खुशहाली तुम दे जाना !








