अपनी सामर्थ्य का एक अंश अग्र समाज के विकास में लगाएँ- राजकुमार मित्तल. श्री अग्रसेन जयंती के पावन अवसर पर अग्र समाज के सशक्तीकरण हितार्थ एक विनम्र अपील. रोजगार में सहयोग व्यापार में सहयोग. अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ किया है आगरा समाज के बंधुओ के लिए एक महा अभियान. एक ईंट- एक रूपया.आइए 365 रुपए वर्ष भर में देकर बने सेवा कार्यों में सहभागी




अपनी सामर्थ्य का एक अंश अग्र समाज के विकास में लगाएँ — राजकुमार मित्तल. श्री अग्रसेन जयंती के पावन अवसर पर अग्र समाज के सशक्तीकरण हितार्थ एक विनम्र अपील. रोजगार में सहयोग व्यापार में सहयोग
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -अग्र समाज के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तीकरण के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन ने समाज के समस्त सामर्थ्यवान उद्योगपतियों, व्यवसायियों एवं संस्थान संचालकों से परस्पर सहयोग की एक सकारात्मक एवं स्थायी कार्य-संस्कृति विकसित करने का विनम्र आग्रह किया है।श्री अग्रसेन जयंती के पावन अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजकुमार मित्तल एवं राष्ट्रीय चेयरमैन, अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन (कल्याण कोष) श्री जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने संयुक्त अपील में कहा कि समाज की उन्नति केवल भावनाओं और विचारों से नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक सामर्थ्य, प्रतिभा, श्रम एवं उद्यमिता के सदुपयोग से संभव है। इसके लिए समाज के सक्षम वर्ग को अपने-अपने स्तर पर कुछ व्यावहारिक एवं प्रभावी संकल्प लेने की आवश्यकता है। अपील में विशेष रूप से दो प्रमुख बिंदुओं पर संकल्पित होने का आग्रह किया गया है —
1. रोजगार में सहयोग : समाज के उद्योगपति एवं संस्थान संचालक अपने संस्थानों में उपलब्ध नौकरियों, नियुक्तियों एवं संविदा कार्यों में योग्य एवं पात्र अग्र बंधुओं को प्राथमिकता देने की स्थायी नीति विकसित करें।
2. व्यापार में सहयोग : संस्थानों के लिए आवश्यक कच्चे माल, सामग्री, सेवाओं तथा अन्य वस्तुओं की खरीदी एवं आपूर्ति में, तथा अपने उत्पादों की बिक्री, डीलरशिप, फ्रेंचाइजी आदि प्रदान करने में योग्य अग्रवाल संस्थानों एवं व्यवसायियों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई जाए।
अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष राजकुमार मित्तल कोलकाता ने अपील में कहा है कि यह अपने समाज की प्रतिभा, उद्यमिता, श्रम और व्यवसाय को परस्पर सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाने का सकारात्मक प्रयास है। दोनों पदाधिकारियों ने समाज के सक्षम वर्ग का आह्वान करते हुए कहा कि — “आइए, हम केवल ‘अग्र समाज के विकास’ की बात न करें, बल्कि अपनी सामर्थ्य का एक अंश अग्र समाज के विकास में लगाएँ।” यही समय की आवश्यकता है और यही हमारा सामूहिक सामाजिक दायित्व है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज के सामर्थ्यवान वर्ग द्वारा इस भावना को व्यक्तिगत एवं संस्थागत कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाया जाए, तो इससे समाज के युवाओं को रोजगार, उद्यमियों को व्यापारिक अवसर तथा संस्थानों को परस्पर सहयोग का एक सुदृढ़ मंच प्राप्त हो सकता है







