कृषि महाविद्यालय नहीं बल्कि शक्ति जिले में कृषि विज्ञान केंद्र को मिली है स्वीकृति- किसानों को मिलेगा इससे नई तकनीक का लाभ.आने वाले समय में कृषि महाविद्यालय खुलने का भी होगा मार्ग प्रशस्त. छत्तीसगढ़ में पूर्व से ही 28 कृषि विज्ञान केंद्र हैं स्थापित



शक्ति जिले में कृषि विज्ञान केंद्र को मिली है स्वीकृति- किसानों को मिलेगा इससे नई तकनीक का लाभ.आने वाले समय में कृषि महाविद्यालय खुलने का भी होगा मार्ग प्रशस्त. छत्तीसगढ़ में पूर्व से ही 28 कृषि विज्ञान केंद्र हैं स्थापित
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के किसान कल्याण एवं पंचायत ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 सितंबर को अपने शक्ति जिले के आगमन के दौरान जेठा के कॉलेज ग्राउंड मैदान में आयोजित सम्मेलन में छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री बिष्णु देव साय एवं जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े की मांग पर शक्ति जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की स्वीकृति प्रदान की है। तथा कृषि विज्ञान केंद्र से जहां जिले के किसानों को नई उन्नत तकनीक की जानकारी होगी तो वहीं अब लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में कृषि महाविद्यालय खुलने का भी मार्ग प्रशस्त होगा।कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), जिसका अर्थ है कृषि विज्ञान केंद्र, भारत में जिला स्तरीय कृषि विस्तार केंद्र है जिसे कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच की खाई को पाटने के लिए बनाया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र खुलने से क्या होगा लाभ
शक्ति जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खुलने से किसानों को अनेकों प्रकार के लाभ मिलेंगे जिसमें प्रमुख रूप से
प्रौद्योगिकी मूल्यांकन: स्थान- विशिष्ट कृषि प्रौद्योगिकियों की पहचान और परिष्करण के लिए खेतों में परीक्षण करना।
अग्रिम पंक्ति के प्रदर्शन: किसानों के खेतों में सीधे तौर पर आधुनिक फसल किस्मों, मशीनरी और कृषि तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
क्षमता विकास: व्यावहारिकता प्रदान करना
किसानों, महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण।
इनपुट आपूर्ति: गुणवत्तापूर्ण बीज, रोपण सामग्री, जैव उर्वरक और पशुधन/मुर्गीपालन नस्लों का उत्पादन और वितरण।
सलाहकार सेवाएं: ज्ञान स्रोत के रूप में कार्य करना
यह संसाधन केंद्र मृदा स्वास्थ्य, मौसम और पौध संरक्षण पर समयोचित कृषि संबंधी सलाह प्रदान करता है। भारत देश में देखा जाए तो भारत के ग्रामीण जिलों में 731 ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र (केवीके) कार्यरत हैं। पहला केवीके (चिकित्सा केंद्र) स्थापित किया गया था 1974 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत पुडुचेरी में। इन्हें आईसीएआर द्वारा वित्त पोषित किया जाता है और ये केंद्र राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), आईसीएआर संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों या राज्य विभागों के माध्यम से संचालित होते हैं। छत्तीसगढ़ में, कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर जैसे केंद्र इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) के तत्वावधान में काम करते हैं
छत्तीसगढ़ में है कुल 28 कृषि विज्ञान केंद्र
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कुल 28 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में ये केंद्र किसानों को कृषि से जुड़ी नई तकनीक और जानकारी देते हैं







