30 जुलाई से हो जाएगी श्रावणी मास की पावन शुरुआत- शिव भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है सावन का महीना. 31 दिनों का होगा सावन का यह पावन पर्व




30 जुलाई से हो जाएगी श्रावणी मास की पावन शुरुआत- शिव भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है सावन का महीना
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति- श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ सावन का पवित्र माह आरंभ हो जाता है। आइए जानते हैं सावन माह का आरंभ किस दिन से हो रहा हैं और कितने पड़ेंगे सावन सोमवार सहित अन्य जानकारी। हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है। भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माह का आरंभ श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ आरंभ हो जाता है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के साथ समाप्त होता है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ माना जाता है। श्रावण माह के दौरान शिवलिंग में जलाभिषेक, दूध अभिषेक करने से लेकर धतूरा, बेलपत्र, गन्ने का रस, आक का फूल आदि चढ़ाने से वह अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ ही श्रावण माह में पड़ने वाले सोमवार विशेष माने जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं भगवान शिव का प्रिय माह सावन कब से शुरू हो रहा है। सावन सोमवार की तिथियां से लेकर हर एक जानकारी
सावन 2026 कब से हो रहा है शुरू?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण मास के कृष्ण प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई को रात 8:05 बजे से प्रारंभ हो रही हैं, जो 30 जुलाई को रात 9:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से सावन माह का आरंभ 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगा।
कब से कब तक रहेंगे सावन?
बता दें कि इस साल कुल 31 दिनों के सावन पड़ रहे हैं। सावन का आरंभ 30 जुलाई से प्रतिपदा तिथि के साथ हो रहा है इसका समापन श्रावण पूर्णिमा तिथि के दिन होगा। बता दें कि श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे से आरंभ होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।पंचांग के अनुसार इस साल कुल 4 ,सावन सोमवार व्रत पड़ेंगे।पहला सावन सोमवार- 3 अगस्त.दूसरा सावन सोमवार- 10 अगस्त.तीसरा सावन सोमवार- 17 अगस्तचौथा सावन सोमवार- 24 अगस्त
हिंदू धर्म में सावन को काफी महत्वपूर्ण माह माना जाता है। इस माह के महत्व के बारे में शिव पुराण से लेकर स्कंद पुराण, पद्म पुराण आदि में दिया गया है शिवपुराण में लिखा है कि इस महीने शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और जल चढ़ाने से कई गुना अधिक किए गए यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है और हर एक पाप से मुक्ति मिलने के साथ शिवलोक की प्राप्ति होती है।श्लोक-श्रावणे मासि योभक्त्या शिवलिङ्गं प्रपूजयेत् सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति॥वहीं स्कन्दपुराण पुराण के लिखा है कि श्रावण मास में स्नान, दान और जप करने के साथ-साथ शिव जी की आराधना करने से सभी प्रकार के दुखों से निजात मिलने के साथ हर एक कामना पूरी हो सकती है।श्लोक-श्रावणे कृत्तिकायुक्ते सोमवारे विशेषतः।शिवपूजां नरः कुर्यात् सर्वकामफलप्रदाम्॥पद्मपुराण की बात करें, तो इसके अनुसार श्रावण मास में व्रत रखने के साथ भगवान शिव का स्मरण करने से जीवन में सुख-शांति हनी रहती हैं। इसके साथ ही आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है और श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक सुख, उत्तम स्वास्थ्य, संतान, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होने की मान्यता है*







