कांग्रेस के गंभीर आरोप -16 जुलाई को शक्ति में आयोजित कांग्रेस की प्रेस वार्ता में कांग्रेसियो ने कहा -राम मंदिर चंदा चोरीः आस्था के नाम पर राजनीति, चढ़ावे के नाम पर लूट अब भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा भी राजनीतिक लूट का शिकार हो गया!

कांग्रेस के गंभीर आरोप -16 जुलाई को शक्ति में आयोजित कांग्रेस की प्रेस वार्ता में कांग्रेसियो ने कहा -राम मंदिर चंदा चोरीः आस्था के नाम पर राजनीति, चढ़ावे के नाम पर लूट अब भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा भी राजनीतिक लूट का शिकार हो गया! kshititech
शक्ति में कांग्रेस की पत्रकार वार्ता

16 जुलाई को शक्ति में आयोजित कांग्रेस की प्रेस वार्ता में कांग्रेसियो ने कहा -राम मंदिर चंदा चोरीः आस्था के नाम पर राजनीति, चढ़ावे के नाम पर लूट अब भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा भी BJP-RSS की राजनीतिक लूट का शिकार हो गया!

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति-शक्ति जिला मुख्यालय के रेस्ट हाउस में कांग्रेस ने प्रेस वार्ता का आयोजन कर कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए। भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की, देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की।आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया?यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।भाजपा राम द्रोही है, उसने पहले चंदा में हेराफेरी करवाया अब चढ़ावा में चोरी। भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण के समय रामशिला पूजन के नाम से जो 14000 करोड़ रू. से अधिक राशि एकत्रित हुआ था। उसका जवाब आरएसएस एवं भाजपा के लोग नहीं दे पाये। उनके ही सहयोगी नेताओं ने ही राम मंदिर निर्माण के समय एकत्रित किये चंदे का आरोप लगाया था। जिन लोगों ने मंदिर बनाने के नाम पर चंदा में हेराफेरी किया था वही लोग मंदिर बनने के बाद चढ़ावे में हेराफेरी करने लगे, इन सबकी पृष्ठ भूमि आरएसएस और भाजपा की रही है। कहा जा सकता है इन घोटालों को आरएसएस भाजपा का संरक्षण रहा है। भाजपा ने देवद्रव्य चोरी करने के महापाप का संरक्षण किया है। राम मंदिर न्यास ट्रस्ट का गठन गृहमंत्री अमित शाह ने किया था इसलिए वहां पर घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी मोदी और शाह की बनती है।कांग्रेस ने किये तीन बड़े सवाल-जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा?अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?

*कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अब तक सामने आए तथ्य अत्यंत गंभीर हैं-श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। यह स्वयं इस बात का संकेत है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है।ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं, जबकि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी उन्हीं की थी। मीडिया रिपोटों के अनुसार, ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोटे) को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर भी गंभीर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं।आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर पूरे प्रकरण को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं। यह जग जाहिर है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से स्वयं को अलग नहीं कर सकती।एसआईटी अब राम मंदिर के बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है। 22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा पर लगभग 113 करोड़ रू. खर्च किए गए, जिसमें लगभग 8,000 अतिथि शामिल हुए।25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग 10.12 करोड़ रू. खर्च किए गए।फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और कथित हेराफेरी के अनेक आरोप सामने आए हैं।छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है।यही नहीं, भाजपा-आरएसएस ने न प्रभु श्री राम के चंदे को छोड़ा और ना ही अब उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले ने भी यह प्रश्न खड़ा किया है किकोई प्रेस कॉन्फ्रेंस इस सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती कि सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर यह कथित घोटाला संभव नहीं हो सकता। टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे, छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी और सीमित कार्रवाई केवल लीपापोती का प्रयास प्रतीत होते हैं, ताकि बड़ी मछलियों तक आंच न पहुंचे

कांग्रेस ने कहा कि देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे प्रकरण पर मौन क्यों हैं?क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी, गोपाल राव और ट्रस्ट के अन्य शीर्ष पदाधिकारी इस पूरे प्रकरण में अपनी जवाबदेही से बच सकते हैं?जब पूरा ट्रस्ट कटघरे में है, तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों?अब तक सामने आए तथ्य अत्यंत गंभीर हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। यह स्वयं इस बात का संकेत है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है।ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं, जबकि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी उन्हीं की थी। मीडिया रिपोटों के अनुसार, ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोटे) को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर भी गंभीर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर पूरे प्रकरण को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं। यह जग जाहिर है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से स्वयं को अलग नहीं कर सकती।एसआईटी अब राम मंदिर के बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है। 22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा पर लगभग 113 करोड़ रू. खर्च किए गए, जिसमें लगभग 8,000 अतिथि शामिल हुए।25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग 10.12 करोड़ रू. खर्च किए गए। फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और कथित हेराफेरी के अनेक आरोप सामने आए हैं।प्रेस वार्ता में प्रेसवार्ता के प्रभारी आशीष सिंह ठाकुर , जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गभेल , महामंत्रीगण , गिरधर जायसवाल, पिंटू ठाकुर , घनश्याम देवांगन , प्रवक्ता दिगम्बर चौबे , किसान कांग्रेस साधेश्वर गबेल , नगर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश राठौर, ब्लाक अध्यक्ष गण रामप्यारे सिदार, श्याम कुमार केवट, गोपाल भारद्वाज ,मंडल अध्यक्ष लाला सोनी , मोर्चा, संगठन पवन साहू , वरिष्ठ कार्यकर्ता कालू अग्रवाल ,रशीद खान ,रथराम पटेल, पुरुषोत्तम साहू , राकेश महंत,अलका जायसवाल अधिवक्तागण ,बंशी खांडे , उमाशंकर चन्द्रा , जागेश्वर सिंह राज प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथी गण उपस्थित थे

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