देश में पहली बार आदिवासी समाज की संस्कृति एवं परंपरा के प्रचार प्रसार के लिए डॉ राम विजय शर्मा के नेतृत्व में मेघदूत मेघमार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा 2026 का ऐतिहासिक शुभारंभ

देश में पहली बार आदिवासी समाज की संस्कृति एवं परंपरा के प्रचार प्रसार के लिए डॉ राम विजय शर्मा के नेतृत्व में मेघदूत मेघमार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा 2026 का ऐतिहासिक शुभारंभ kshititech
डॉ रामविजय शर्मा के नेतृत्व में निकली यात्रा

डॉ राम विजय शर्मा के नेतृत्व में मेघदूत मेघमार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा 2026 का ऐतिहासिक शुभारंभ

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -डॉ राम विजय शर्मा के नेतृत्व में मेघदूत मेघमार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा 2026 का ऐतिहासिक शुभारंभ ग्राम मृगाडांड़ तहसीलउदयपुर, जिला सरगुजा छत्तीसगढ़ में आषाढ़ मास के प्रथम दिवस (30 जून 2026)पर कूटज फूल (कोरिया फूल) से आदिवासी परंपरा के अनुसार मेघ की पूजा केसाथ शुरू हुआ। इस अवसर पर ग्राम मृगाडांड़ के बैगा एवं पंडो समाज हर्ष एवंउल्लास के साथ करमा नृत्य तथा मांदर की थाप से गुंजित रामगढ़ पहाडी की तलहटी में स्थित हाथी पोल प्रस्तर नाट्य शाला से शुरू किया गया। यह अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा मृगाडांड़ से शुरू होकर रतनपुर, पसान, अमरकंटक,विदिशा, उज्जैन, देवगढ़, मंदसौर, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, काठमांडू, (नेपाल), ल्हासा (तिब्बत) होते हुए मानसरोवर (अल्कापुरी) तक जाएगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पंडो आदिवासी संस्कृति का प्रचार, अन्य सभी आदिवासी संस्कृति का
प्रचार, आदिवासी चिकित्सा, आदिवासी खानपान, भवन निर्माण कला, टैटू कला,चित्रकला, का प्रचार, विश्व के आदिवासियों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान है।मार्ग मे पडने वाल बैगा जनजाति, गोड जनजाति, सहरिया जनजाति, मीणा जनजाति, भील जनजाति, भोटिया जनजाति तथा नेपाल एवं तिब्बत के जनजातियो से संवाद एवं गोष्ठी के माध्यम से सांस्कृतिक ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा। रास्ते मे पडने वाले पुरातात्विक एवं धार्मिक स्थला सहित पेड़ पौधे तथा वनस्पितियों का अध्ययन किया जाएगा। इस अवसर पर तेलंगाना प्रांत से पधारेतेलगू के वरिष्ठ साहित्यकार वरिगोंडा कान्तराव मुख्य अतिथि के रूप में तथा अध्यक्षता डॉ राम विजय शर्मा इतिहासकार, पुरातत्ववेता एवं अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ता रायपुर भारत ने की। मुख्य अतिथि वरिगोंडा कान्तराव ने अपने उदबोधन में बताया कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडों की जन्म स्थली मृगाडांड़ मे आकर अपाल खुशी हो रही है। जिस पंडो समाज के घर में जा रहे है वहा हर्ष और उत्साह का माहौल है तथा जिस घर मे जा रहे है वही घर लग रहा है कि कालिदास का घर है। डॉ राम विजय शर्मा ने आदिवासी महाकति कालिदास पंडो पर शोध कर विश्व के आदिवासी समाज पर बड़ा उपकार किया है तथा छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, बिहार, उडिसा सहित भारत के विभिन्न प्रांतो के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे है

इस यात्रा से विश्व के ज्ञान में वृद्धि होगी। अध्यक्ष डॉ राम विजय शर्मा ने अपने उदबोधन मे बताया कि हम पंडो आदिवासी समाज के ऋणी है जिसने कालिदास जैसे साहित्यकार को विश्व को दिया। कालिदास के साहित्य का अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, रूस, नेपाल, तिब्बत, भूटान, श्रीलंका के साहित्य को बडे पैमाने पर प्रभावित किया। मै भाग्यशाली हूं कि मुझे आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो पर शोध करने का ईश्वर ने अवसर दिया तथा अब मेघदूत मेघमार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा 2026 का आयोजन कर रहा हूं। इस कार्य में मृगाडांड के पंडो आदिवासी समाज तथा अन्य आदिवासी समाज का सहयोग मिल रहा है। 30 जून 2026 का दिन जनजातीय इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा और विश्व के आदिवासी समाज मृगाडांड आकर मृगाडांड की माटि से माथे पर तिलक लगाएंगे, हम प्रयास करेंगें कि मेघदूत मेघमार्ग जो मृगाडांड से शुरू होकर मानसरोवर तक जाती है उसे विश्व धरोहर में शामिल किया जाए। उन्होने कोरिया फूल के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा बताया कि छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का नामकरण इसी कोरिया फूल के नाम के आधार पर हुआ है। हमे आशा करनी चाहिए कि छत्तीसगढ़ शासन तथा भारत सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि शिवचरण पंडो ने बताया कि मृगाडांड के पूरे पंडो समाज तथा छत्तीसगढ़ के पुरे पंडो आदिवासी समाज कालिदास पंडो जी के बताए मार्गो पर चलेंगें तथा उनके उपदेशो का पालन करेंगें। धीरन पंडो ने बताया कि मृगाडांड के जंगल में जड़ी-बुटी भरा है रोगो के इलाज मे काम आता है। विशिष्ट अतिथि आनंद राम पंडो ने निवेदन किया कि हाथी पोल प्रस्तर नाट्य शाला का मंच जीर्णशीर्ण हो गया है जिसे शासन को मरम्मत करना चाहिए तथा विशाल मंच बनाना चाहिए। हाथी पोल में हजारो साल से पंडो समाज पूजा करते आ रहा है तथा करमा नृत्य भी होता है। यह हमारी धरोहर है। इस अवसर पर गाँव के गन्यमान नागरिक, महिलाएं, बच्चे शामिल होकर यात्रा को ऐतिहासिक बनाया।पूरा आदिवासी समाज डॉ राम विजय शर्मा का आभारी रहेगा

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