गौ पालन योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े की शिकायत पीएमओ तक, पांच वर्षों के सभी प्रकरणों की उच्चस्तरीय जांच की मांग.फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोन व सब्सिडी लेने और गायों की मौत दर्शाकर बीमा राशि हड़पने का आरोप, जांजगीर-चांपा में मचा हड़कंप


गौ पालन योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े की शिकायत पीएमओ तक, पांच वर्षों के सभी प्रकरणों की उच्चस्तरीय जांच की मांग.फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोन व सब्सिडी लेने और गायों की मौत दर्शाकर बीमा राशि हड़पने का आरोप, जांजगीर-चांपा में मचा हड़कंप
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति-पशुपालन विभाग की गौ पालन योजना में कथित बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े की शिकायत अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान जांजगीर-चांपा जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गौ पालन योजना के अंतर्गत बैंक ऋण, सरकारी सब्सिडी तथा पशुधन बीमा का लाभ उठाकर शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराते हुए प्रत्येक स्वीकृत प्रकरण की बारीकी से जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि योजना के वास्तविक उद्देश्य को दरकिनार कर कुछ लोगों ने विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की कथित मिलीभगत से योजनाओं का दुरुपयोग किया। आरोप है कि कई मामलों में गायों की वास्तविक खरीदी ही नहीं हुई, बल्कि फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार कर बैंक से ऋण और शासन से सब्सिडी प्राप्त कर ली गई।
कागजों में गाय खरीदी, हकीकत में रही पुराने मालिक के पास
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई प्रकरणों में जिस गाय को हितग्राही द्वारा खरीदा हुआ दर्शाया गया, वह वास्तव में किसी अन्य व्यक्ति की थी। दस्तावेजों में केवल मालिक का नाम बदलकर सब्सिडी स्वीकृत करा ली गई। राशि मिलने के बाद गाय दोबारा अपने वास्तविक मालिक के पास पहुंच गई, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में वह हितग्राही के नाम पर ही दर्ज रही।
गायों की मौत दिखाकर बीमा राशि हड़पने का आरोप
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि योजना के तहत बीमित गायों की मृत्यु दर्शाकर बीमा कंपनियों से दावा प्राप्त किया गया। आरोप है कि कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों और कथित मिलीभगत के आधार पर बीमा राशि निकालकर हड़प ली गई। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पिछले पांच वर्षों के सभी बीमा दावों की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
पांच वर्षों के सभी प्रकरणों की जांच की मांग
शिकायत में विशेष रूप से मांग की गई है कि वर्षवार स्वीकृत प्रत्येक गौ पालन योजना का रिकॉर्ड खंगाला जाए। इसमें बैंक ऋण, सब्सिडी भुगतान, पशुओं की टैगिंग, बीमा दस्तावेज, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड तथा वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
- पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत सभी हितग्राहियों का सत्यापन.
- प्रत्येक गाय के टैग नंबर का मौके पर मिलान।
- खरीद-बिक्री के दस्तावेजों की वैधता की जांच।
- बैंक से जारी ऋण और सब्सिडी भुगतान का ऑडिट।
- बीमा दावों और मृत्यु प्रमाणों की स्वतंत्र जांच।
- गाय वर्तमान में किसके कब्जे में है, इसका भौतिक सत्यापन।
फर्जीवाड़े में बड़े नेटवर्क की आशंका
शिकायत में दावा किया गया है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो केवल फर्जी हितग्राही ही नहीं, बल्कि बिचौलियों, पशु विक्रेताओं और संबंधित विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसलिए पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से कराने की मांग की गई है।
शिकायत की जांच पर टिकी निगाहें
प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग और राज्य शासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। यदि शिकायत के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रदेश की गौ पालन योजनाओं में सामने आने वाले सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक साबित हो सकता है।

