लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है आज 25 जून का वह दिन- गिरधर गुप्ता वरिष्ठ भाजपा नेता. श्री गुप्ता ने कहा- संविधान हत्या दिवस पर लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए संघर्ष करने वाले सभी सेनानियों को सादर नमन. गिरधर ने कहा- 21 महीने तक देश में रहा आपातकाल




लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है आज 25 जून का वह दिन- गिरधर गुप्ता वरिष्ठ भाजपा नेता. श्री गुप्ता ने कहा- संविधान हत्या दिवस पर लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए संघर्ष करने वाले सभी सेनानियों को सादर नमन
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय 25 जून सन 1975 को कहा जाता है। जिस दिन देश में आपातकाल इमरजेंसी लगा दी गई थी। तथा आज पूरे देश में इस दिन को भारतीय जनता पार्टी संविधान हत्या दिवस के रूप में देश की जनता को इमरजेंसी के समय की क्रूरता को लेकर जागरुक कर रही है। 25 जून 1975 के उस दिन पर अपनी बातें रखते हुए अविभाजित मध्य प्रदेश खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष। पूर्व प्रदेश भाजपा महामंत्री गिरधर गुप्ता कहते हैं कि भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 (कुल 21 महीने) तक का समय ‘आपातकाल इमरजेंसी के रूप में दर्ज है, जिसे अक्सर “लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय” कहा जाता है।इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की थी। तथा देश में इमरजेंसी लगने के बाद नागरिकों के सभी मौलिक अधिकार रद्द कर दिए गए थे। सरकार के खिलाफ बोलने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘मीसा’ जैसे सख्त कानूनों के तहत बिना कारण बताए जेल में डाल दिया गया था। जयप्रकाश नारायण (JP), अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था मीडिया पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई और अखबारों को छापने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी
इमरजेंसी के उन दिनों पर चर्चा करते हुए गिरधर गुप्ता कहते हैं कि अदालतों की शक्ति को सीमित कर दिया गया और सरकार के फैसलों को चुनौती देना लगभग असंभव हो गया था। आपातकाल के दौरान संविधान में कई ऐसे संशोधन किए गए जिनका मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका और विधायिका की शक्तियों को कमजोर करके कार्यपालिका (प्रधानमंत्री कार्यालय) को असीमित अधिकार देना था।यह दौर भारतीय राजनीति में तानाशाही और असहमति को कुचलने का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। 2025 में भारत सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में घोषित किया, ताकि इस काले अध्याय और संविधान की रक्षा के लिए हुए संघर्ष को याद रखा जा सके


