अब बेनकाब होंगे रामलला का चढ़ावा डकारने वाले बेईमान। एसआईटी ने मुख्यमंत्री को सौंपी चढ़ावा कांड की जांच रिपोर्ट. अब होगी बेईमानों के खिलाफ एफ आई आर. मामले की प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट के कर्मियों की जिम्मेदारियो में पाई गई भारी चूक


अब बेनकाब होंगे रामलला का चढ़ावा डकारने वाले बेईमान। एसआईटी ने मुख्यमंत्री को सौंपी चढ़ावा कांड की जांच रिपोर्ट. अब होगी बेईमानों के खिलाफ एफ आई आर
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि की चोरी के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के अब प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रबल संभावना है। एसआईटी के सदस्यों ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल कर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। तीनों सदस्य शनिवार शाम को ही लखनऊ रवाना हो गए थे।बताया जा रहा कि अब तक की जांच में कई प्रकार के संज्ञेय अपराध मिले हैं और विभिन्न स्तरों पर खामियां पाई गई हैं। ट्रस्ट में नहीं होने के बाद भी गोपाल राव अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे, तो ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया। गणना के दौरान चोरी पाई गई है और कई लोगों के बयान दस्तावेज से मेल नहीं खा रहे हैं। इन अहम तथ्यों के सामने आने के बाद अब एसआईटी स्थानीय थाने में एफआआर दर्ज करा कर जांच आगे बढ़ाएगी।कानून के जानकारों ने कहाकि प्रदेश सरकार का यह कदम गबन मामले से जुड़े तथ्यों को ढूंढ़ने का रहा है। अब जबकि एसआईटी ने छह दिनों की जांच में तथ्य खोज लिए और प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप दी, तो अब अपराध दर्ज करा इसकी विवेचना की जाएगी। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक सूर्य कुमार शुक्ल कहते हैं कि दान की नकदी की गणना में कहीं न कहीं चूक तो हुई ही है। इसमें चाहे बैंककर्मियों की मिलीभगत रही हो या उदासीनता। इन कर्मियों ने अपनी जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन नहीं किया। इसी का फायदा उठा कर कुछ कर्मियों ने लालच में आकर ऐसा कृत्य कर दिया, जिससे लोगों की आस्था के साथ मजाक हुआ। इस मामले में ट्रस्ट व बैंक के स्तर से निगरानी कमजोर रही।राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन मामले से जुड़े तथ्यों को खोजने के लिए किया था। अब छह दिनों की जांच में एसआईटी ने कई तथ्य तलाश लिए होंगे। यदि कोई संज्ञेय अपराध मिला होगा, तो प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद अब एफआइआर दर्ज कराई जा सकती है।उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पूर्व न्यायमूर्ति डीपी सिंह भी कहते हैं कि गबन प्रकरण की एसआईटी जांच से पहले एफआइआर नहीं दर्ज कराना गलत नहीं है। प्रदेश सरकार फैक्ट फाइंडिंग इन्क्वायरी बिना प्राथमिकी दर्ज कराए ही करा सकती है। यदि प्रारंभिक जांच में संज्ञेय अपराध मिलेगा तो अब आगे एफआईआर के सहारे एसआईटी आगे बढ़ेगी।उन्हाेंने बताया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने ललित कुमार के मामले में विस्तृत आदेश दे रखा है। वहीं, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ सिंह इसे स्पष्ट रूप से अनुचित ठहराते हैं।वह कहते हैं कि बिना एफआइआर दर्ज कराए किसी मामले का इंवेस्टीगेशन हो ही नहीं सकता है। इससे अपराधियों को मदद मिलेगी और जांच से पहले ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ होने की आशंका है। उन्होंने कहा, एसआईटी को पहले ही एफआइआर दर्ज करा कर जांच आगे बढ़ानी चाहिए थी।

