शक्ति जिले के अर्जुनी गांव की बेटी गोपिका ने कमाल कर दिया- जिस बेटी को महाविद्यालय प्रबंधन ने यह कहकर प्रवेश नहीं दिया था कि वह अकेली लड़की है. किंतु आज सात जिलों की अधिकारी है गोपिका गबेल. शक्ति से ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की गोपिका ने. सामाजिक कार्यकर्ता मीनाक्षी प्रेमशंकर गबेल की बहन है गोपीका. कृषि महाविद्यालय ने अपने 66 में स्थापना दिवस पर गोपिका को किया सम्मानित

शक्ति जिले के अर्जुनी गांव की बेटी गोपिका ने कमाल कर दिया- जिस बेटी को महाविद्यालय प्रबंधन ने यह कहकर प्रवेश नहीं दिया था कि वह अकेली लड़की है. किंतु आज सात जिलों की अधिकारी है गोपिका गबेल. शक्ति से ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की गोपिका ने. सामाजिक कार्यकर्ता मीनाक्षी प्रेमशंकर गबेल की बहन है गोपीका. कृषि महाविद्यालय ने अपने 66 में स्थापना दिवस पर गोपिका को किया सम्मानित kshititech
महाविद्यालय के स्थापना दिवस पर गोपिका का हुआ सम्मान
शक्ति जिले के अर्जुनी गांव की बेटी गोपिका ने कमाल कर दिया- जिस बेटी को महाविद्यालय प्रबंधन ने यह कहकर प्रवेश नहीं दिया था कि वह अकेली लड़की है. किंतु आज सात जिलों की अधिकारी है गोपिका गबेल. शक्ति से ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की गोपिका ने. सामाजिक कार्यकर्ता मीनाक्षी प्रेमशंकर गबेल की बहन है गोपीका. कृषि महाविद्यालय ने अपने 66 में स्थापना दिवस पर गोपिका को किया सम्मानित kshititech
गोपिका  अपने विभागीय सहयोगियों के साथ

शक्ति जिले के अर्जुनी गांव की बेटी गोपिका ने कमाल कर दिया- जिस बेटी को महाविद्यालय प्रबंधन ने यह कहकर प्रवेश नहीं दिया था कि वह अकेली लड़की है. किंतु आज सात जिलों की अधिकारी है गोपिका गबेल. शक्ति से ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की गोपिका ने. सामाजिक कार्यकर्ता मीनाक्षी प्रेमशंकर गबेल की बहन है गोपीका

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति अविभाजित मध्य प्रदेश के समय से विकासखंड शक्ति.वर्तमान सक्ती जिले के अर्जुनी गांव के प्रतिष्ठित नागरिक श्री जगन्नाथ प्रसाद गबेल की मेधावी बिटिया जिनकी प्राथमिक शिक्षा शासकीय प्राथमिक शाला अर्जुनी एवं शक्ति के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हुई। अर्जुनी गांव से निकलकर 1988 बैच की बी एस सी की विद्यार्थी एवं कृषि महाविद्यालय की पहली छात्रा श्रीमती गोपिका गबेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वे प्री एग्रीकल्चर एग्जाम में चयनित होकर एडमिशन हेतु कॉलेज पहुंची तब एकमात्र छात्रा होने के कारण प्रबन्धन ने एडमिशन नहीं देने की बात कही और कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में जाने की सलाह दी।महाविद्यालय प्रबंधन ने एक छात्रा के लिए रहने व पढ़ाई, सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की कारणों को वजह बताया लेकिन उन्होंने जिद ठान ली एवं प्रबंधन से कहा कि वे स्वयं के रिस्क में इसी महाविद्यालय में पढ़ाई करेंगी। प्रबंधन ने उनके आत्मविश्वास और जिद को देखकर आखिरकार एडमिशन दे दिया। बी एस सी एग्रीकल्चर में पासआउट होकर मध्यप्रदेश शासन के एम पी वूमेन इन एग्रीकल्चर की डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर के रूप में जबलपुर, कटनी सीहोर में कार्य किया। उसके पश्चात पीएससी के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के कृषि विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर पोस्टिंग मिली

गोपिका गबेल वर्तमान में दुर्ग संभाग के 07 जिलों के ज्वाइंट डायरेक्टर एग्रिकल्चर के रूप में कार्यरत है।कृषि महाविद्यालय रायपुर ने अपने 66वा स्थापना दिवस सेलिब्रेट किया जिसमें कृषि महाविद्यालय के प्रथम बैच से लेकर वर्तमान बैच, पासआउट विभिन्न प्रोफेसर, अधिकारियों को सम्मानित किया गया। श्रीमती गोपिका गबेल को विश्वविद्यालय की प्रथम उत्तीर्ण छात्रा के रूप में कुलपति डॉ गिरीश चंदेल द्वारा सम्मानित किया गया। गोपिका की यह सफलता निश्चित रूप से उनके आत्मविश्वास एवं जज्बे का ही ज्वलंत उदाहरण है। कि आज उन्होंने दशकों पूर्व कुछ कर गुजरने की अटूट इच्छा शक्ति से आज यह मुकाम हासिल किया। तथा श्रीमती गोपिका ग़बेल शक्ति जिले के अर्जुनी गांव की मेधावी बिटिया होने के साथ ही आज गांव वालों को भी इस बात का गर्व होता है कि उनकी बिटिया ने आज पूरे देश में अपने कामों से क्षेत्र का नाम रोशन किया तथा गोपिका के परिवारजन भी आज उनके जज्बे को सलाम करते हैं तथा उनकी बहन श्रीमती मीनाक्षी प्रेमशंकर गबेल भी कहती है कि उन्होंने गोपिका के इस आत्मविश्वास को देखते हुए हमेशा उन्हें सहयोग किया तथा आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया एवं आज गोपीका के जीवन में सफलताओं की इन सभी कामयाबियों को देखकर उनका पूरा परिवार बेहद प्रसन्न है

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