शॉपिंग मॉल द्वारा छोटे-बड़े वाहनों से वसूला जाने वाला पार्किंग शुल्क अवैध निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था देनी होगी माल संचालकों को. जिला उपभोक्ता फोरम का महत्वपूर्ण फैसला. पार्किंग शुल्क के नाम पर चल रहा अवैध कारोबार

शॉपिंग मॉल द्वारा छोटे-बड़े वाहनों से वसूला जाने वाला पार्किंग शुल्क अवैध निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था देनी होगी माल संचालकों को. जिला उपभोक्ता फोरम का महत्वपूर्ण फैसला. पार्किंग शुल्क के नाम पर चल रहा अवैध कारोबार kshititech

शॉपिंग मॉल द्वारा छोटे-बड़े वाहनों से वसूला जाने वाला पार्किंग शुल्क अवैध निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था देनी होगी माल संचालकों को. जिला उपभोक्ता फोरम का महत्वपूर्ण फैसला

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों में बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल के संचालकों द्वारा छोटे-बड़े वाहनों से पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध उगाही की जाती है। तथा इससे जहां वाहन मालिकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ उठना पड़ता है। तो वहीं ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता फोरम रायपुर ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अतिरिक्त पीठ, रायपुर(छ.ग) न्यायालय ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल को वाहनो से पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करते हुए निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश पारित किया है

ज्ञात हो कि अवैध पार्किंग वसूली शुल्क को लेकर उच्च न्यायालय अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला द्वारा प्रस्तुत परिवाद पर सुनवाई करते हुएजिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अतिरिक्त पीठ
रायपुर की अदालत ने प्रकरण क्रमांक DC/387/CC/2025/198 में अंबुजा सिटी सेंटर मॉल रायपुर छत्तीसगढ़ को किसी भी वाहन टू व्हीलर या फोर व्हीलर से आने वाले उपभोक्ताओं से कोई पार्किंग शुल्क वसूली नहीं की जायेगी उक्त प्रकरण को अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला स्वयं ने पैरवी की हैँ।दिनांक 15.06.2025 को परिवादी अपनी फोर व्हीलर वाहन क्रमांक CG 10 BM 9901 से अंबुजा मॉल गया था जहाँ उससे 30 रूपए पार्किंग शुल्क लिये गए | परिवादी ने विरोध किया की उसे पार्किंग स्थल का उपयोग नहीं करना है केवल अपनी माताजी को छोड़ कर निकल जाना है परन्तु मॉल प्रबंधन ने जानकारी दी की अंबुजा मॉल में फ्री पिक अप ड्राप जैसी कोई सुविधा नहीं है । इस कथन से आहत होकर अधिवक्ता शुक्ला ने न्यायालय में अंबुजा मॉल के विरुद्ध पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करने की मांग करते हुए एक परिवाद प्रस्तुत किया था।प्रकरण की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शुक्ला ने माननीय गुजरात उच्च न्यायालय तथा विभिन्न उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए न्यायालय के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया कि मॉल के द्वारा वसूली जा रही पार्किंग शुल्क राशि अवैध है एवं मानसिक क्षति के रूप में ₹50,000 की मांग भी परिवादी ने की है।न्यायालय ने प्रस्तुत तर्कों और विधिक दृष्टांतों का संज्ञान लेते हुए उन्हें विधिसम्मत माना और मॉल को वाहनो से पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करते हुए निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने को निर्देशित किया है।यह निर्णय आमजनमानस को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

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