ब्रेकिंग न्यूज़-दहेज प्रताड़ना सहित 31 मामलों में अब सीधे नहीं होगी एफआईआर

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दहेज प्रताड़ना सहित 31 मामलों में अब सीधे नहीं होगी एफआईआर

सक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -उत्तर प्रदेश में आपराधिक मामलों की दर्ज प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब दहेज उत्पीड़न और चेक बाउंस समेत कुल 31 श्रेणियों के मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कर सकेगी। इन मामलों में अब सबसे पहले संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष वाद दायर करना होगा, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।यह निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एक मामले में की गई सख्त टिप्पणी के बाद लिया गया है। इसके अनुपालन में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इन नए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।न्यायिक आदेश के बाद ही होगी जाँचजारी निर्देशों के अनुसार, अब इन विशेष प्रकार के मामलों को ‘नॉन-कॉग्निजेबल’ (असंज्ञेय) या शिकायत आधारित प्रक्रिया के तहत माना जाएगा। इसका अर्थ है कि पुलिस ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। शिकायतकर्ता को पहले मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देना होगा। यदि मजिस्ट्रेट मामले को गंभीर और आधारपूर्ण पाते हैं, तभी पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू करने का आदेश दिया जाएगा।इस नई प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मामलों की प्रारंभिक जाँच न्यायिक स्तर पर सुनिश्चित करना है, ताकि अनावश्यक विवादों या झूठे मामलों की छंटनी हो सके और निर्दोषों को राहत मिल सके।

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