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BIG BREKING-विद्युत विभाग के अधिकारी से हुई 37 लाख रुपए की ठगी,डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने ठगा,थाने पहुंचते ही  02 लाख रुपये किए गए होल्ड

BIG BREKING-विद्युत विभाग के अधिकारी से हुई 37 लाख रुपए की ठगी,डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने ठगा,थाने पहुंचते ही  02 लाख रुपये किए गए होल्ड kshititech

विद्युत विभाग के अधिकारी से हुई 37 लाख रुपए की ठगी,डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने ठगा

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती- डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर साइबर ठगों ने विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त परिवेक्षक से 36.97 लाख रुपये की ठगी कर ली, साइबर थाना रायगढ़ में अपराध दर्ज हुआ है,शिकायतकर्ता के साइबर थाना आने पर 2 लाख कराया गया होल्ड,एसएसपी शशि मोहन सिंह का जागरूकता संदेश — “पुलिस या जांच एजेंसी कभी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती, ऐसे कॉल पूरी तरह साइबर ठगी हैं, सतर्क रहें,रायगढ़ जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें अज्ञात साइबर ठगों ने खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए विद्युत विभाग के एक सेवानिवृत्त परिवेक्षक से 36,97,117 रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित द्वारा 17 फरवरी 2026 को साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में लिखित आवेदन देकर घटना की शिकायत दर्ज कराई गई है, जिस पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 02/2026 धारा 308(6), 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।

साइबर ठगी के शिकार विद्युत विभाग के पीड़ित ने बताया कि वह जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी से परिवेक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुआ है। 14 जनवरी 2026 को उसके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का कॉल आया, जिसने स्वयं को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया से संबंधित बताते हुए कहा कि उसके पहचान पत्र का उपयोग कर जियो कंपनी का मोबाइल नंबर लेकर गलत गतिविधियां की जा रही हैं। इसके बाद कॉल को तथाकथित टेलीकॉम अधिकारी एवं दिल्ली के बारह खंभा रोड पुलिस स्टेशन के फर्जी अधिकारी से कनेक्ट कराया गया, जिन्होंने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी,इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर स्वयं को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए कहा कि उसके खिलाफ गंभीर अपराध दर्ज है और उसे जांच में सहयोग करना होगा। ठगों ने पीड़ित से उसके बैंक खाते, संपत्ति और अन्य वित्तीय जानकारी ली तथा यह कहकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई कि जांच पूरी होने के बाद राशि वापस कर दी जाएगी। ठगों की धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद साइबर थाना में शिकायतकर्ता आने पर तत्काल रिपोर्ट करने पर लगभग 2 लाख रुपये होल्ड कराया गया,साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक नासिर खान में पीड़ित को बताया कि वे जितनी जल्दी शिकायत लेकर थाने आते या नेशनल साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करते तो उनके रुपए हॉल कराया जा सकता था। पीड़ित के रिपोर्ट पर रायगढ़ साइबर थाने द्वारा बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है

इस संबंध में रायगढ़ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों को जागरूक करते हुए कहा कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा कभी भी मोबाइल कॉल, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते हैं। इस प्रकार के कॉल पूरी तरह साइबर ठगी का हिस्सा होते हैं। नागरिक ऐसे कॉल से सावधान रहें, किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।”

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