केड सती दादी जी का मंगल पाठ- बाराद्वार में पहली बार केडिया परिवार द्वारा श्री केड सती दादी जी का भव्य मंगल पाठ संपन्न, देश के विभिन्न स्थानों से पहुंचे समाज बंधु, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष महंत भी पहुंचे आयोजन में, विद्या भूमि स्कूल परिसर में आयोजित था भव्य कार्यक्रम




केड सती दादी जी का मंगल पाठ- बाराद्वार में पहली बार केडिया परिवार द्वारा श्री केड सती दादी जी का भव्य मंगल पाठ संपन्न, देश के विभिन्न स्थानों से पहुंचे समाज बंधु, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष महंत भी पहुंचे आयोजन में
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती-बाराद्वार नगर में पहली बार केडिया परिवार के सहयोग से श्री केड सती दादी जी का मंगल पाठ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं भव्यता के साथ संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूरे क्षेत्र के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत केंद्र बना, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दादी जी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।मंगल पाठ के अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं द्वारा सवामणी एवं छप्पन भोग अर्पित किए गए,भजन–कीर्तन, पाठ-वाचन, नृत्य नाटिका और आरती के साथ पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं की आस्था, अनुशासन और सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सुचारु एवं दिव्य रूप से संपन्न हुआ।
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि केड सभा से जुड़े श्रद्धालु पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से बाराद्वार पहुंचे और कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर सेवा, सहयोग और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया,मंगल पाठ का महत्व श्री केड सती दादी जी का मंगल पाठ सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दादी जी का मंगल पाठ करने से परिवार में कल्याण, व्यवसाय में उन्नति, रोग-शोक से मुक्ति तथा जीवन में सद्भाव और संतुलन प्राप्त होता है। दादी जी का आशीर्वाद भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा, विश्वास और मार्गदर्शन प्रदान करता है।कार्यक्रम के समापन पर केडिया परिवार द्वारा सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं, केड सभा के पदाधिकारियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। साथ ही यह प्रार्थना की गई कि श्री केड सती दादी जी सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और समाज में सुख, शांति एवं समृद्धि का संचार होता रहे।यह भव्य मंगल पाठ न केवल बाराद्वार के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बना, बल्कि सामूहिक आस्था और एकता का भी सशक्त संदेश देकर गया







