जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति ने किया मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत प्रेस वार्ता का आयोजन, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा- मोदी जी ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म करके श्रमिकों के काम के अधिकार को है छीना, जिला अध्यक्ष रश्मि गबेल ने कहा- मनरेगा देश के गरीब से गरीब लोगों के रोजगार का थी सहारा

जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति ने किया मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत प्रेस वार्ता का आयोजन, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा- मोदी जी ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म करके श्रमिकों के काम के अधिकार को है छीना, जिला अध्यक्ष रश्मि गबेल ने कहा- मनरेगा देश के गरीब से गरीब लोगों के रोजगार का थी सहारा kshititech
प्रेस वार्ता को संबोधित करते पूर्व मंत्री उमेश पटेल
जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति ने किया मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत प्रेस वार्ता का आयोजन, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा- मोदी जी ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म करके श्रमिकों के काम के अधिकार को है छीना, जिला अध्यक्ष रश्मि गबेल ने कहा- मनरेगा देश के गरीब से गरीब लोगों के रोजगार का थी सहारा kshititech
प्रेस वार्ता को संबोधित करती जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति की अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गबेल
जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति ने किया मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत प्रेस वार्ता का आयोजन, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा- मोदी जी ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म करके श्रमिकों के काम के अधिकार को है छीना, जिला अध्यक्ष रश्मि गबेल ने कहा- मनरेगा देश के गरीब से गरीब लोगों के रोजगार का थी सहारा kshititech
शक्ति में 10 जनवरी को आयोजित कांग्रेस की प्रेस वार्ता

जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति ने किया मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत प्रेस वार्ता का आयोजन, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा- मोदी जी ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म करके श्रमिकों के काम के अधिकार को है छीना

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर 10 जनवरी को जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति द्वारा स्थानीय रेस्ट हाउस में मनरेगा बचाओ संघर्ष संगम कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तरीय प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री एवं खरसिया के विधायक उमेश नंदकुमार पटेल, कार्यक्रम समन्वयक प्रशांत मिश्रा एवं कांग्रेस कमेटी शक्ति जिला अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गबेल, चंद्रपुर के विधायक रामकुमार यादव, नेता प्रतिपक्ष महंत जी के जिला प्रतिनिधि ठाकुर गुलजार सिंह प्रमुख मंच पर उपस्थित रहे, प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए खरसिया के विधायक उमेश पटेल ने कहा की मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है,मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।मोदी सरकार ने “सुधार” के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है।अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है।

उमेश पटेल ने कहा कि- मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है।अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना / नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा।मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोज़गार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोज़गार से दूर रखा जा सकता है, मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60-40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी

जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति की प्रेस वार्ता में छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री श्री पटेल ने बताया कि मोदी सरकार अब राज्यों पर “जी राम जी” का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है।100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई।मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है।भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है,V.B.G.RAM.G.” में जो राम जी बता रहे उसमें कही भी भगवान राम नहीं है। “V.B.G.RAM.G.” का फूल फार्म है विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण) है, कांग्रेस की आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से जिला अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गबेल, नेता प्रतिपक्ष महंत जी के जिला प्रतिनिधि ठाकुर गुलजार सिंह, विधायक प्रतिनिधि अमित राठौर, विधायक प्रतिनिधि एवं पूर्व मंडी अध्यक्ष रूप नारायण साहू,राजीव जायसवाल, कांग्रेस के जिला प्रवक्ता एवं विधायक प्रतिनिधि गिरधर जायसवाल, कुसुम यादव, पार्षद संतोष सोनी लाला, जागेश्वर सिंह राज, सहित काफी संख्या में शक्ति जिले के विभिन्न विकासखंडों के कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने बताई तकनीकी जानकारी- कहां मनरेगा को कैसे कमजोर किया-मनरेगा में पहले था,मोदी सरकार ने क्या बदला (जी राम जी)

01- कांग्रेस नेताओं के अनुसार हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी—अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी

02- हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी किंतु अब काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा

03- आप पूरे साल काम की मांग कर सकते थे किंतु अब फसल कटाई के मौसम में आपको काम नहीं मिलेगा

04- आपको कानूनी न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी दी गई थी किंतु अब आपकी मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी

05- ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था किंतु अब आप कहां और क्या काम करेंगे, यह सरकार तय करेगी

06- आपके काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी किंतु अब आपको किसी मेट या रोजगार सहायक की मदद नहीं मिलेगी

07- प्रेस वार्ता में उपस्थित पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि आपकी मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के आपको काम उपलब्ध कराती थी किंतु अब खर्च अब राज्य सरकारों को आपकी मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद देना होगा बचाने के लिए हो सकता है राज्य मजदूरों को काम ही न दें

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