रमाकांत की कार सेवा- अयोध्या के राम मंदिर के दशकों पूर्व संपन्न कार सेवा से लेकर मंदिर निर्माण तक का सफर,कार सेवक जांजगीर के अधिवक्ता रमाकांत राजवाड़े का यात्रा वृतांत, रमाकांत ने कहा कार सेवकों का वह जुनून अपने आप में एक यादगार पल, वर्तमान जांजगीर-चंपा कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने भी की थी कार सेवा

रमाकांत की कार सेवा- <em>अयोध्या के राम मंदिर के दशकों पूर्व संपन्न कार सेवा से लेकर मंदिर निर्माण तक का सफर,कार सेवक जांजगीर के अधिवक्ता रमाकांत राजवाड़े का यात्रा वृतांत, रमाकांत ने कहा कार सेवकों का वह जुनून अपने आप में एक यादगार पल, वर्तमान जांजगीर-चंपा कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने भी की थी कार सेवा</em> kshititech
अयोध्या जाने वाले दशकों पूर्वक के कार सेवक जांजगीर के अधिवक्ता रमाकांत रजवाड़े

अयोध्या के राम मंदिर के दशकों पूर्व संपन्न कार सेवा से लेकर मंदिर निर्माण तक का सफर,कार सेवक जांजगीर के अधिवक्ता रमाकांत राजवाड़े का यात्रा वृतांत, रमाकांत ने कहा कार सेवकों का वह जुनून अपने आप में एक यादगार पल, वर्तमान जांजगीर-चंपा कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने भी की थी कार सेवा

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सकती-कार सेवा का आयोध्या स्मरण रमाकांत राजवाड़े द्वारा–सन 1990 में विश्व परिषद द्वारा राम मंदिर निर्माण हेतु कार सेवा का आव्हान किया गया मैं उस समय भारतीय जनता युवा मोर्चा नवागढ मण्डल का अध्यक्ष या गांव-गांव जाकर आयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु कार सेवा में जाने घर घर जाकर जनजागरण किया। कार सेवा हेतु हमारा दल 12 अक्टुबर 1990 को मैला रेल्वे स्टेशन से रवाना हुआ। हमारे साथ 50 कार सेवकों का जत्था था। जिसका गठनायक दिलीप सिंह गैसमुडी थे,हमारे साथ में व्यास कश्यप (विधायक जांजगीर-चांपा), प्रमोद तिवारी, जनक राम कर्ष, एवं अन्य कार सेवक थे। नैला रेल्वे स्टेशन से बिलासपुर फिर सारनाथ एक्सप्रेस द्वारा नैनी रेल्वे स्टेशन तक हमारा गत्था पहुंचा, प्रयागराज पहुंचने के बाद हम कुछ युवा कार सेवकों को प्रबंधन में लगा दिया गया। प्रयागराज में मंदिर में एक सप्ताह सभी कार सेवकों का रहने एवं भोजन की व्यवस्था करते रहे, मोजन प्रत्येक घर से बनकर आता था जिसके घर में जितने सदस्य होते थे उससे दुगना मोजना प्रत्येक घर में बनता था। बचा भोजना को हमारा टीम प्रयागराज में लेने घर-घर जाते थे और सभी कार सेवकों को वितरण करते थे। प्रयागराज वासियों को कार सेवको का स्वागत एवं भोजन व्यवस्था करने अभूतपूर्व उत्साह था, एक सप्ताह प्रयागराज में रहने के बाद देश भर के सभी कार सेवक आ जाने पर विश्व हिन्दु परिषद का अयोध्या कुछ करने का निर्देष हुआ। हम लोग आयोध्या के लिए लाखों की संख्या में कार सेवक जुलुस निकालकर निकल पड़े फाफा महू पुल जो काफी लंबा है उसमें कार सेवक जैसे हीं पहुंचे उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कार सेवकों को रोकने का प्रयास किया गया नहीं रोक पाने पर गुस्साये पुलिस एवं पी.ए.सी. के जवान पुल को घेरकर लाठी चार्ज एवं आसुगेस के गोले छोड़ने लग गये जिससे हमारे साथियों को काफी चोंट आई थी, किसी तरह हम भागकर आयोध्या की ओर आगे बढ़े। हमको जगह-जगह में रोकने का प्रयास किया गया

रास्ता रोकने हेतु बाढ़ लगा दिया गया एवं आवगमन रोकने हेतु मुख्य मार्ग को खोदकर खाई बना दिया गया,फाफा महू लाठी चार्ज के बाद हमारे साथ गये सभी सदस्य अलग-अलग हो गये रमाकांत राजवाड़े, व्यास कश्यप एवं प्रमोद तिवारी ही साथ रह गये थे। दृढ निश्चय था कि हमकों 30. 10.1990 के पहले आयोध्या पहुंचना है, इसलिए लगातार आगे चलते रहे। हम लोग मुख्य रास्ता बंद होने के कारण गांव एवं खेत के रास्ते से नदी-नाला पार करते हुए आयोध्या पहुंचे हमकों 15 बार गिरफ्तार भी किया गया लेकिन गिरफ्तारी के बाद अस्थायी जेल के रूप में स्कूल कॉलेज भवन ले जाया जाता था। कार सेवकों की इतना भीड़ होता था कि पुलिस वाले ही हमकों तुरंत बताकर बाहर निकाल देते थे। प्रयागराज से आयोध्या लगभग 300 कि.मी. की दूरी पैदल चलने पर अभूतपूर्व आनंद मिल रहा था, रास्ते भर में हमारा अभूतपूर्व स्वागत हो रहा था। प्रत्येक गांव में जो रास्ता में था वहां के गांव प्रधान एवं कोटवार एवं मुखिया रास्ता दिखानें में लगे रहते थे। प्रत्येक गांव के व्यक्ति रात-दिन कार सेवकों का सेवा कर रहे थे। प्रत्येक घर में कुछ न कुछ खाने पीने का सामान लेकर यहां के घर वाले अपने घर के सामने खड़े रहते थे। कार सेवकों का सेवा रामकाज मानकर कर रहे थे, जहां नदी नाला पड़ता वहां नाव वाले अपने को केंवट मानकर रातदिन कार सेवकों को नदी पार करवा रहे थे। हम लोगो के पैर में चलते चलते काफी सूजन हो गया था, जिसको गांव वाले पूरा सेवा कर रहे थे। हम लोग 29.10.1990 को प्रयागराज से लगातार चलकर आयोध्या पहुंच गये। देव उठनी एकादशी दिनांक 30.10.1990 को कार सेवा प्रारंभ होना था आयोध्या के मंदिर में हमारा निवास स्थान रखा गया था। हम लोग सुबह सरयू नदी में स्नान कर कार सेवा में चले गये भारी भीड़ था पूरा आयोध्या जय श्री राम एवं रामलला हम आयेंगे मंदिर वही बनाएंगे की नारे से गुंज रहा था। दिनांक 30.10.1990 को कार सेवा प्रारंभ हो गया बाबरी मस्जिद क्षतिग्रस्त हो गया

कार सेवक जांजगीर के अधिवक्ता रमाकांत राजवाड़े ने अपना यात्रा वृतांत सुनाते हुए बताया कि रास्ते में जुलूस को रोकने हेतु एवं पी.ए.सी. के जवानों द्वारा गंभीर लाठी चार्ज एवं आंसु गैस छोड़ा जाता रहा। जिससे कोई भी कार सेवक विचलित नही हुआ। आंसु गैस से बचने के लिए हम लोगो को मंदिर में बताया गया था कि आंख के किनारे चुना लेप करने एवं तौलिया को गिलाकर आंख को पोछने से आंसु गैस का प्रभाव नही पड़ता सभी कार सेवक इसका पालन कर रहे थे,सभी कार सेवक अनुशासन में रहकर कार सेवा में थे। दिनांक 30.10.1990 को बाबरी मस्जिद टुटने से उत्तर प्रदेश सरकार बदले की भावना से कार सेवकों पर गोली चलाना प्रारंभ कर दिया

सभी कार सेवक अनुशासन में रहकर कार सेवा में थे। दिनांक 30.10.1990 को बाबरी मस्जिद टुटने से उत्तर प्रदेश सरकार बदले की भावना से कार सेवकों पर गोली चलाना प्रारंभ कर दिया हजारों कार सेवक बलिदान हो गये पूरा आयोध्या खुन से लाल हो गया। दिनांक 30.10.1990 के कार सेवा के बाद प्रशासन के दमनात्मक निती के खिलाफ 02.11.1990 को विरोध मार्च निकाला गया जो शांतिपूर्ण राममंदिर की ओर बढ़ रहा था। उत्तर प्रदेश के मुलायम सिंह सरकार द्वारा रोकने हेतु आंसु गैस लाठी चार्ज किया गया। भीड़ को तब भी रोक नही पाने से पुलिस उग्र हो गया तथा कार सेवकों पर गोली बरसाना चालू कर दिये। कई स्थानों पर गोली चलाया गया जिससे हजारों कार सेवक शहीद हो गये हम लोग जुलूस में चल रहे थे हमारे सामने भी पुलिस द्वारा गोली चलाया गया हम लोगो के साथ चल रहे कार सेवकों को भी गोली लगी थी हम लोग बाल-बाल बच गये तथा एक घर में घुस गये मकान मालिक द्वारा हमकों संरक्षण दिया गया तथा अपने पलंग के नीचे घुसने को कहा गया हम लोग पलंग के नीचे घुसे थे वहां भी पी.ए.सी. के जवान यहां कार सेवक थोड़ी है कहकर तालासी ले रहे थे हम लोग सांस बंद करके पलंग के नीचे छिप गये थे। पुलिस द्वारा पलंग को अपने बंदुक से पीटकर देखे कि यहां कोई कार सेवक थोड़ी है हम लोग का जान भारी मुश्किल से बचा, 3-4 घंटे बाद माहौल शांत हुआ तो घर से बाहर निकले रास्ते में देखे कि पूरा शहर खून से लाल हो गया है जगह-जगह खुन दिख रहा था तथा कचड़ा फेकने वाली गाड़ी से कार सेवकों की लाश सरयू नदी की तरफ ले जा रहे थे। विश्व हिन्दु परिषद द्वारा कार सेवा स्थगित करने पर हम लोग आयोध्या से प्रतापगढ़ बस में आये। रेल्वे स्टेशन में प्रशासन द्वारा हमको छोड़ा गया तथा ट्रेन के लिए फी पास का शील हमारे दाहिने हाथ में लगा दिया गया। ट्रेन में टीटी आता तो दिखा देते टिकट नहीं मांगते थे। एक माह बाद अपने घर बनारी वापस आये कार सेवक में आने के बाद हमारा जगह-जगह स्वागत किया गया,दूसरा कार सेवा हेतु 1992 में आयोध्या गये थे उसमें नैला से सीधा प्रयागराज होते हुए आयोध्या पहुंचे एवं 06.12.1992 को कार सेवा कर वापस जांजगीर आये उस समय उत्तर प्रदेश में भाजपा कल्याण सिंह की सरकार थी। कार सेवा में किसी प्रकार से असुविधा नहीं हुई। शासन एवं प्रशासन कार सेवकों के साथ था

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