प्रेरणादाई है डॉक्टर नीता नायक का जीवन-श्री बालाजी हॉस्पिटल की बैकबोन डॉ .नीता नायक. अगर महिलाएं ठान लें, तो वे घर और प्रोफेशनल लाइफ के बीच संतुलन बनाकर हर मुकाम हासिल कर सकती हैं।सफलता के लिए केवल किताबी शिक्षा ही काफी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास सबसे जरूरी है




प्रेरणादाई है डॉक्टर नीता नायक का जीवन-श्री बालाजी हॉस्पिटल की बैकबोन डॉ .नीता नायक अगर महिलाएं ठान लें, तो वे घर और प्रोफेशनल लाइफ के बीच संतुलन बनाकर हर मुकाम हासिल कर सकती हैं।सफलता के लिए केवल किताबी शिक्षा ही काफी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास सबसे जरूरी है
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित बालाजी ग्रुप आफ मेडिकल कॉलेजेस आज पूरे देश में चिकित्सा एवं मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में पहचान का मोहताज नहीं है. तथा बालाजी ग्रुप के डॉक्टर देवेंद्र नायक ने दशको पूर्व रायपुर में बालाजी हॉस्पिटल की नींव रखी एवं इस हॉस्पिटल ने जहां पूरे कोरोना के संक्रमण काल में लोगों को अच्छी चिकित्सा देकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया तो वहीं इस ग्रुप की डॉक्टर श्रीमती नीता नायक का भी जीवन एक प्रेरणादाई जीवन है। तथा कभी अस्पताल के लिए 1500 वर्ग फीट जमीन भी नहीं थी, किंतु आज दो मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना बालाजी ग्रुप ने की है
डॉक्टर श्रीमती नीता नायक कहती है कि मैं और मेरे पति डॉ. देवेंद्र नायक, ‘हम 1 और 1 दो नहीं, बल्कि 1 और 1 ग्यारह हैं’ यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि उस साझेदारी की पहचान है, जिसने एक छोटे से क्लीनिक को मेडिकल हब में बदल दिया। मोवा स्थित श्री बालाजी हॉस्पिटल की डायरेक्टर नीता नायक जब यह कहती हैं, तो उनके शब्दों में 17 साल की मेहनत, समझ और भरोसे की पूरी कहानी झलकती है। नीता नायक बताती हैं कि एक समय था जब 1500 स्क्वेयर फीट की जमीन भी अस्पताल खोलने के लिए नहीं थीं, लेकिन आज वह सपना वटवृक्ष बन चुका है।वर्षों पूर्व हम दोनों ने एक बड़े मेडिकल इंस्टीट्यूट का सपना देखा। ‘कई बार लगता था कि इतना बड़ा सपना क्या सच में पूरा हो पाएगा लेकिन हमने कोशिश करना नहीं छोड़ा,’ वे याद करती हैं। आज जिस संस्थान का नाम चिकित्सा के क्षेत्र में भरोसे के साथ लिया जाता है, उसकी शुरुआत इतनी छोटी थी कि कभी अस्पताल के लिए 1500 वर्ग फीट जमीन तक उपलब्ध नहीं थी। लेकिन सपने बड़े थे, और उन सपनों को थामे रखने का साहस भी। नीता बताती हैं कि यही वजह है कि 17 वर्षों में अस्पताल में सिविल कंस्ट्रक्शन और अपग्रेडेशन का काम लगातार जारी है
अब अगला लक्ष्य- कैंसर के इलाज में नई पहचान
श्री बालाजी हॉस्पिटल अब एक और बड़े कदम की ओर बढ़ रहा है। कैंसर डिपार्टमेंट को सर्व-सुविधायुक्त बनाने की तैयारी है और जल्द ही एक कैंसर रिसर्च सेंटर शुरू करने की योजना भी है। इसके साथ ही, ‘मां पद्मावती मेडिकल कॉलेज’ प्रोजेक्ट पर काम जारी है, जो राजधानी में इस ग्रुप का दूसरा मेडिकल कॉलेज होगा। यानी सफर अभी रुका नहीं है- बल्कि और बड़ा हो रहा है।
साल 2004- एक छोटा-सा क्लीनिक और सीमित संसाधन
।नीता नायक बताती हैं कि मेडिकल लाइन की ओर उनका झुकाव हमेशा से था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं
अस्पताल में स्टाफ हमारा स्टाफ नहीं,वहीं हमारा परिवार है.और वहीं है असली ताकत
नीता नायक के लिए अस्पताल सिर्फ एक संस्थान नहीं, एक परिवार है। वे कहती हैं, ‘हमारा स्टाफ हमारी ताकत है।’ नसिंर्ग और पैरामेडिकल स्टाफ की शिक्षा और विकास पर खास ध्यान दिया जाता है। एक महिला होने के नाते वे महिला मरीजों और स्टाफ की जरूरतों को बेहतर समझती हैं, और यही कारण है कि अस्पताल उनके लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद जगह बन पाया है।
डॉक्टर की पत्नी होना आसान नहीं था
इस सफलता के पीछे कई अनकही चुनौतियां भी हैं। नीता नायक बताती हैं कि कई बार ऐसा हुआ जब उनके बेटे तेजस की अपने पिता से दो-दो दिन तक मुलाकात नहीं हो पाती थी। डॉ. नायक देर रात तक अस्पताल में व्यस्त रहते थे। ‘लेकिन मैंने कभी शिकायत नहीं की- क्योंकि मुझे पता था कि यह सिर्फ नौकरी नहीं, जिम्मेदारी है,’ वे कहती हैं। यही समझ और सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी, और ‘1+1=11’ की सोच ने हर मुश्किल को आसान किया।
आत्मविश्वास, जो हर महिला को आगे बढ़ाता है
अपनी बात खत्म करते हुए नीता नायक महिलाओं के लिए एक सीधा संदेश छोड़ती हैं- ‘सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, आत्मविश्वास भी जरूरी है। अगर महिलाएं ठान लें, तो वे घर और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में संतुलन बनाकर हर मुकाम हासिल कर सकती हैं।’ वे खुद इसका उदाहरण हैं, जहां एक तरफ किटी पार्टी की सहजता है, तो दूसरी तरफ अस्पताल के सालभर की प्लानिंग का अनुशासन से कोई समझौता नहीं। अस्पताल में दवाइयों और उपकरणों की खरीदी सीधे मैन्युफैक्चरर से की जाती है, ताकि मरीजों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। जब मेडिकल कॉलेज नहीं था, तब भी दूर-दराज के मरीजों के लिए रियायती दरों पर इलाज और दवाइयों की व्यवस्था की गई।आज आयुष्मान योजना के जरिए हर मरीज को इलाज का भरोसा दिया जा रहा है। ‘हमारे लिए प्रॉफिट-लॉस से ज्यादा मायने मरीज का विश्वास रखता है


