निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबो का बोझ होगा कम- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को दिया नोटिस. आयोग ने कहा- निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को क्यों दिया जा रहा है बढ़ावा

निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबो का बोझ होगा कम- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को दिया नोटिस. आयोग ने कहा- निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को क्यों दिया जा रहा है बढ़ावा kshititech

निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबो का बोझ होगा कम- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को दिया नोटिस

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -देश के निजी स्कूलों में हर साल अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले ‘महंगी किताबों’ के बोझ को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है.आयोग ने छात्रों और अभिभावकों पर निजी पब्ल‍िशर्स की महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव डालने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर दिया है.एनएचआरसी मेंबर प्रियंक कानूनगो की खंडपीठ का कड़ा रुख यह पूरी कार्रवाई नमो फाउंडेशन की उस शिकायत के आधार पर हुई है, जिसमें निजी स्कूलों द्वारा कमीशन के चक्कर में महंगी और भारी-भरकम किताबें थोपने का आरोप लगाया गया था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने न केवल राज्यों से रिपोर्ट मांगी है, बल्कि शिक्षा मंत्रालय को भी जवाब तलब किया है.आयोग ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल उठाया है. NHRC के अनुसार, सरकारी और निजी स्कूलों में अलग-अलग पाठ्यक्रम और अलग-अलग किताबें लागू करना अकादमिक भेदभाव की श्रेणी में आ सकता है. आयोग ने पूछा है कि जब देश में SCERT और NCERT जैसी संस्थाएं मानक पुस्तकें तैयार करती हैं तो निजी प्रकाशकों की किताबों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है

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