मुरथल के रेशम ढाबों पर रोबोट परोस रहे हैं चाय पराठा. हाईटेक सर्विस के दीवाने हुए लोग.₹1100 की एक थाली. पूरा परिवार कर रहा भोजन




मुरथल के रेशम ढाबों पर रोबोट परोस रहे हैं चाय पराठा. हाईटेक सर्विस के दीवाने हुए लोग.₹1100 की एक थाली. पूरा परिवार कर रहा भोजन
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -अगर खाने-पीने के साथ अलग अनुभव करना चाहते हैं तो आपको मुरथल के ढाबों में जाना चाहिए। यहां के ढाबे अब किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह हाई-टेक हो चुके हैं। यहां बच्चों और युवाओं को आकर्षित करने के लिए तकनीक का जबरदस्त इस्तेमाल किया गया है।रेशम ढाबे पर 20-20 की रो में 40 टेबल लगाई गई हैं। इन पर किचन की दीवार के साथ लंबी पटरियां बिछाई गई हैं जो सीधे ग्राहक की टेबल (प्लेटफॉर्म) तक पहुंचती हैं।किचन के अंदर से टेबल नंबर का बटन दबाते ही टाय ट्रेन खाना लेकर उसी टेबल पर रुकती है। यह कॉन्सेप्ट पूरे देश में मशहूर हो रहा है।खाना सर्व करते नजर आते हैं। ग्राहकों को कमांड के जरिए रोबोट द्वारा खाना मिलना एक नया अनुभव प्रदान करता है।हर ढाबे पर क्यूआर कोड और हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा है, जो इसे आधुनिक पीढ़ी के अनुकूल बनाती है।
मुरथल की पहचान यूं तो यहां के परांठ ही हैं, लेकिन अब आपको यहां साउथ इंडियन, चाइनीज और कॉन्टिनेटन सब तरह का खाना मिलेगा। हालांकि परांठे” की बादशाहत बरकरार है। आलू, “याज, गोभी, मूली और मेथी क” अलावा अब यहां सीजनल परांठ” और तंदूरी परांठा (कम मख्खन चाहने वालों के लिए) की भारी डिमांड हमेशा रहती है।रेशम ढाबे पर परोसा जाने वाला विशाल परांठा पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय है। इसे एक विशाल थाली में 14 कटोरियों(दाल, सब्जियां, रायता, खीर, सलाद, मिठाई व पापड़) के साथ पेश किया जाता है।जब भी कोई ग्राहक इस किंग साइज परांठे का ऑर्डर देता है तो एक वेटर बड़ी थाली उठाता है और दूसरा वेटर आगे‐आगे घंटी बजाते हुए चलता है। यह नजारा लोगों को इतना पसंद आता है कि लोग खाना खाने से ज्यादा तस्वीरें खींचने में व्यस्त हो जाते हैं। 1100 रुपये की यह थाली पूरे परिवार के लिए पर्याप्त होती है






