राहुल पर भड़के नितिन-भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा-राहुल गांधी का आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत. श्री नवीन ने कहा लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार. किंतु विरोध और अराजकता में है अंतर


राहुल पर भड़के नितिन-भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा-राहुल गांधी का आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत. श्री नवीन ने कहा लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार किंतु विरोध और अराजकता में है अंतर
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा किए गए कृत्य को लेकर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का व्यवहार न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है।श्री नवीन ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसा गरिमामय पद गंभीरता और जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है, किंतु राहुल गांधी के आचरण से यह स्पष्ट होता है कि वे इस पद की गरिमा को भी पर्याप्त महत्व नहीं देते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध मर्यादा की सीमाएं लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है।उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय अराजकता के प्रतीक बनते जा रहे हैं। श्री नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और वे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। उन्होंने आज की घटना को भारत के राजनीतिक इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण एवं काला दिन बताया।श्री नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा ने वर्षों तक विपक्ष में रहते हुए अपनी भूमिका निभाई, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मुद्दों को लेकर छात्र अपनी बात रख रहे हैं, सरकार उन पर चर्चा करने के लिए तैयार है। राहुल गांधी द्वारा रखी गई शर्तों को भी सरकार ने स्वीकार किया था, किंतु संवाद और समाधान का अवसर आने पर वे अपने ही रुख से पीछे हट गए। उनके अनुसार यह राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को दर्शाता है

