घर लौट आओ. भारत माता को आपकी प्रतिभा की जरूरत है.भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी के सह संस्थापक श्रीधर ने करी भारतीय पेशेवरों से अपील.भावुक हुए श्रीधर

घर लौट आओ. भारत माता को आपकी प्रतिभा की जरूरत है.भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी के सह संस्थापक श्रीधर ने करी भारतीय पेशेवरों से अपील.भावुक हुए श्रीधर kshititech
जोहो के सह संस्थापक श्रीधर बेबू

घर लौट आओ. भारत माता को आपकी जरूरत है.भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी के सह संस्थापक श्रीधर ने करी भारतीय पेशेवरों से अपील

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने भारतीय पेशेवरों से स्वदेश लौटने की भावुक अपील की है। उन्होंने अमेरिका में रह रहे भारतीयों को संबोधित करते हुए खुला पत्र सोमवार को एक्स पर साझा किया।उन्होंने लिखा, कृपया घर लौट आओ। भारत माता को आपकी प्रतिभा की जरूरत है। भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाने में मदद करें। हमारी युवा आबादी को मार्गदर्शन करने के लिए वर्षों के अनुभव से प्राप्त आपके तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता है। जोहो भारतीय बहुराष्ट्रीय टेक्नोलाजी कंपनी है जो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और क्लाउड आधारित बिजनेस टूल्स बनाने के लिए मशहूर है। इसे गूगल वर्कस्पेस का भारतीय विकल्प माना जाता है। वेंबू की यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती किए जाने की आशंकाए हैं। एच-1बी वीजा प्रोग्राम अमेरिकी प्रशासन के नए दबाव का सामना कर रहा है।

एच-1बी वीजा का उपयोग अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा विदेशी श्रमिकों को काम पर रखने के लिए उपयोग किया जाता है। रिपब्लिकन सांसदों ने एच-1बी प्रोग्राम को तीन साल के लिए निलंबित करने की मांग करते हुए विधेयक पेश किया है। वेंबू ने पत्र में लिखा कि दुनियाभर में भारतीयों को जो सम्मान मिलता है, साथ ही देश की समृद्धि और सुरक्षा सब भारत की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने 37 साल पहले के उस समय को याद किया जब अमेरिका प्रवास के दौरान उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन उनके पास अच्छी शिक्षा और भारत की सांस्कृतिक विरासत थी।उन्होंने लिखा, आपने असाधारण सफलता हासिल की। अमेरिका हमारे लिए अच्छा रहा। इसके लिए हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए कृतज्ञता भारतीय तरीका है।हालांकि उन्होंने पीड़ा जाहिर करते हुए लिखा कि कई अमेरिकी मानते हैं कि भारतीय अमेरिकी नौकरियां “छीन लेते हैं” और अमेरिका में हमारी सफलता अनुचित तरीके से हासिल की गई है। अमेरिका में ऐसे विचार रखने वाले लोगों की संख्या शायद बहुमत में नहीं है, लेकिन वह बहुत कम भी नहीं है।वेंबू ने लिखा, अमेरिकी राजनीति में भारतीय महज दर्शक हैं। उनके पास दक्षिणपंथी” या वामपंथी में से चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि दोनों में से कोई भी पक्ष विदेश में भारतीयों के लिए सम्मान की गारंटी नहीं देता।वेंबू ने पोस्ट किया, अगर भारत गरीब बना रहता है, तो जागरूक वामपंथी हमें दया भाव से नैतिक उपदेश देंगे और कट्टरपंथी दक्षिणपंथी तिरस्कार से भरे अलग तरह के उपदेश देंगे। हमें भ्रमित नहीं होना चाहिए।*

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