182 करोड रुपए की जिहादी ड्रग की बड़ी खेफ़ नारकोटिक्स विभाग ने करी जब्त. गृहमंत्री अमित शाह ने करी घोषणा. गृह मंत्री शाह ने कहा- भारत की जमीन का उपयोग कर बाहर भेजे जाने वाले हर अपराध पर सरकार करेगी बड़ी कार्रवाई

182 करोड रुपए की जिहादी ड्रग की बड़ी खेफ़ नारकोटिक्स विभाग ने करी जब्त. गृहमंत्री अमित शाह ने करी घोषणा. गृह मंत्री शाह ने कहा- भारत की जमीन का उपयोग कर बाहर भेजे जाने वाले हर अपराध पर सरकार करेगी बड़ी कार्रवाई kshititech

182 करोड रुपए की जिहादी ड्रग की बड़ी खेफ़ नारकोटिक्स विभाग ने करी जब्त. गृहमंत्री अमित शाह ने करी घोषणा

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -केंद्र सरकार ने देश में पहली बार ‘जिहादी ड्रग’ के नाम से कुख्यात सिंथेटिक स्टिमुलेंट कैप्टागॉन की एक बड़ी खेप जब्त करने की घोषणा की है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत यह कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान मध्य पूर्व भेजी जा रही 182 करोड़ रुपये की इस ड्रग को बरामद किया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ के संकल्प को दोहराते हुए बड़ा खुलासा किया है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह बताते हुए खुशी हो रही है कि‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत एजेंसियों ने पहली बार कैप्टागॉन (जिसे ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है) की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये बताई गई है।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मध्य पूर्व के लिए भेजी जा रही ड्रग की खेप का भंडाफोड़ और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, ड्रग्स के खिलाफ हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने की) नीति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के शानदार उदाहरण हैं। भारत में ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू है। देश में आने या यहां से गुजरने वाले हर ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई होगी।

उन्होंने दोहराया, ‘हम देश में आने या भारत की जमीन का इस्तेमाल कर बाहर भेजे जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर कार्रवाई करेंगे। NCB के बहादुर और चौकस योद्धाओं को बधाई।”कैप्टागॉन एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसे आमतौर पर ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है। इस ड्रग का मिडिल ईस्ट में अवैध कारोबार काफी बड़ा है और इस पर आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।हालांकि, जिहादी ड्रग’ कोई आधिकारिक वैज्ञानिक नाम नहीं है, बल्कि मीडिया और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। इसका संबंध कैप्टागॉन नाम की एक सिंथेटिक ड्रग से है, जिसे कई रिपोर्ट्स में आतंकवादी गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है।कैप्टागॉन एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट ड्रग है। इसका असली नाम फेनेथिलीन है। इसे 1960 के दशक में दवाइयों के तौर पर बनाया गया था, लेकिन बाद में साइड इफेक्ट के कारण ज्यादातर देशों में बैन कर दिया गया। इस दवा का उत्पादन 1980 के दशक में बंद हो गया था।इसकी उत्पादन लागत कम होने और गैर-कानूनी तौर पर इसकी मांग बहुत ज्यादा होने की वजह से, कुछ इलाकों में कैप्टागॉन को गरीब आदमी का कोकीन भी कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कैप्टागॉन के व्यापार को मध्य-पूर्व में उभरते हुए सबसे बड़े सिंथेटिक ड्रग खतरों में से एक के तौर पर पहचाना है

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