डॉलर बनियान के मालिक दीनदयाल गुप्ता का कोलकाता में हुआ निधन. एक सिलाई मशीन से 1700 करोड रुपए का खड़ा किया साम्राज्य. होजरी और इनरवियर की सबसे बड़ी कंपनी है डॉलर.हरियाणा के मानहेरू में जन्मे थे दीनदयाल जी. लोगों के लिए प्रेरणा बन गए दीनदयाल

डॉलर बनियान के मालिक दीनदयाल गुप्ता का कोलकाता में हुआ निधन. एक सिलाई मशीन से 1700 करोड रुपए का खड़ा किया साम्राज्य. होजरी और इनरवियर की सबसे बड़ी कंपनी है डॉलर.हरियाणा के मानहेरू में जन्मे थे दीनदयाल जी. लोगों के लिए प्रेरणा बन गए दीनदयाल kshititech
डॉलर ग्रुप के संस्थापक श्री दीनदयाल गुप्ता जी कोलकाता

डॉलर बनियान के मालिक दीनदयाल गुप्ता का निधन. एक सिलाई मशीन से 1700 करोड रुपए का खड़ा किया साम्राज्य. होजरी और इनरवियर की सबसे बड़ी कंपनी है डॉलर.हरियाणा के मानहेरू में जन्मे थे दीनदयाल जी

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -डॉलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के फाउंडर और मानद चेयरमैन दीनदयाल गुप्ता का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने एक सिलाई मशीन से शुरुआत कर 1700 करोड़ रुपये का इनरवियर साम्राज्य खड़ा किया, जो उनकी प्रेरणादायक व्यावसायिक यात्रा को बताता है। होजरी और इनरवियर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डॉलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के फाउंडर और मानद चेयरमैन दीनदयाल गुप्ता का शनिवार, 2 मई 2026 को उम्र संबंधी बीमारियों के चलते निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। अपने पीछे पत्नी, चार बेटे और पोते-पोतियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए दीनदयाल गुप्ता की कहानी सिर्फ एक बिज़नेस की नहीं, बल्कि शून्य से शिखर तक पहुंचने की एक बेहद प्रेरणादायक दास्तान है। आज उनका डॉलर इंडस्ट्रीज का 1,700 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय संभाल रहा है।

गांव से कोलकाता तक का सफर कैसे शुरू हुआ?

13 सितंबर, 1937 को हरियाणा के भिवानी जिले के मानहेरू गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे दीनदयाल गुप्ता 1962 में अवसरों की तलाश में कोलकाता आ गए थे। उन्होंने इस शहर के होजरी उद्योग में एक दशक बिताया और मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और कपड़ा व्यापार की बारीकियां सीखीं। 1972 में उन्होंने सीमित पूंजी और पारिवारिक सहयोग के साथ ‘भवानी टेक्सटाइल्स’ के नाम से एक छोटी सी होजरी निर्माण इकाई की नींव रखी

1700 करोड़ के साम्राज्य में कैसे बदली डॉलर ?

शुरुआती दशकों में कंपनी ने कड़ा संघर्ष किया।1986 में जब उनके बेटे विनय कुमार गुप्ता महज 18 साल की उम्र में व्यवसाय में शामिल हुए, तब कंपनी का सालाना राजस्व सिर्फ 30 लाख रुपये था और रूपा व लक्स जैसे स्थापित दिग्गजों से उसे कड़ी टक्कर मिल रही थी।कंपनी के लिए असली टर्निंग पॉइंट 1991 में एक दिवाली डिनर के दौरान आया। दीनदयाल जी ने अपने सबसे बड़े बेटे विनोद गुप्ता (जो चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और 1987 से फर्म का ऑडिट कर रहे थे) से अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर पारिवारिक व्यवसाय में पूरी तरह शामिल होने को कहा। उन्होंने कहा, “तुम अपनी पेशेवर विशेषज्ञता को पारिवारिक व्यवसाय में लगाकर इसे बड़ा क्यों नहीं बनाते?” विनोद ने ऐसा ही किया। उ कंपनी के कामकाज का कंप्यूटरीकरण किया, रिटेलर्स के लिए क्रेडिट सुविधाएं और मार्जिन बढ़ाया तथा आक्रामक मार्केटिंग शुरू की, जिससे बिक्री के आंकड़े तेजी से बढ़ने लगे

डॉलर नाम कैसे मिला ?

वर्ष 1998 में कंपनी का नाम भवानी टेक्सटाइल्स से बदलकर ‘डॉलर इंडस्ट्रीज’ कर दिया गया। यह एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। ‘डॉलर’ दुनिया की सबसे अधिक पहचानी जाने वाली मुद्रा है, यह नाम तुरंत याद हो जाने वाला और एक प्रीमियम अहसास देने वाला था। विनोद गुप्ता ने डिस्ट्रीब्यूटर्स का एक लॉयल नेटवर्क बनाने के लिए मनाली, गोवा और काठमांडू जैसी जगहों पर एक्स मीट आयोजित किए।

सफलता का मूल मंत्र क्या था ?

दीनदयाल गुप्ता की सफलता का रहस्य उनकी मेहनत, स्मार्ट ब्रांडिंग और पारिवारिक एकता में छिपा था। जैसे-जैसे समय बीता,2014 के बाद से परिवार की तीसरी पीढ़ी (अंकित गौरव, आयुष, वेदिका और पल्लवी गुप्ता) व्यवसाय से जुड़ गई। उन्होंने एचआर (HR) को आधुनिक बनाया और महिलाओं के परिधान खंड को बढ़ाया। 1.25 लाख से अधिक रिटेलर्स और 1,000 डिस्ट्रीब्यूटर्स के मजबूत नेटवर्क ने डॉलर को शेयर बाजार में लिस्टेड भारत का अग्रणी इनरवियर ब्रांड बना दिया

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