जो बीत गया सो बीत गया, आगत का स्वागत करता हूं।चिंतन अतीत का त्याग दिया, अब आज का अर्चन करता हूं- एल आर जायसवाल, साहित्यकार लुन्दराम जयसवाल की कवितावली का हुआ भव्य विमोचन समारोह, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रमेश सिंघानिया भी रहे मौजूद

जो बीत गया सो बीत गया, आगत का स्वागत करता हूं।चिंतन अतीत का त्याग दिया, अब आज का अर्चन करता हूं- एल आर जायसवाल, साहित्यकार लुन्दराम जयसवाल की कवितावली का हुआ भव्य विमोचन समारोह, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रमेश सिंघानिया भी रहे मौजूद kshititech
कवितावली का विमोचन समारोह
जो बीत गया सो बीत गया, आगत का स्वागत करता हूं।चिंतन अतीत का त्याग दिया, अब आज का अर्चन करता हूं- एल आर जायसवाल, साहित्यकार लुन्दराम जयसवाल की कवितावली का हुआ भव्य विमोचन समारोह, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रमेश सिंघानिया भी रहे मौजूद kshititech
कवितावली का विमोचन समारोह
जो बीत गया सो बीत गया, आगत का स्वागत करता हूं।चिंतन अतीत का त्याग दिया, अब आज का अर्चन करता हूं- एल आर जायसवाल, साहित्यकार लुन्दराम जयसवाल की कवितावली का हुआ भव्य विमोचन समारोह, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रमेश सिंघानिया भी रहे मौजूद kshititech
कवितावली का विमोचन समारोह

जो बीत गया सो बीत गया, आगत का स्वागत करता हूं।चिंतन अतीत का त्याग दिया, अब आज का अर्चन करता हूं- एल आर जायसवाल, साहित्यकार लुन्दराम जयसवाल की कवितावली का हुआ भव्य विमोचन समारोह

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल के खबर

सक्ती-गायत्री शक्ति पीठ सक्ति में 14 फरवरी शनिवार को सांस्कृतिक विकास मंच सक्ति के अध्यक्ष एल आर जायसवाल के काव्य संकलन “ललितावली” का समारोह पूर्वक विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ हरीश दुबे द्वारा संगीतमय सरस्वती वंदना और राजकीय गीत ‘अरपा पैरी के धार’ से हुआ। स्वागत गान तिलोत्तमा पांडे ने प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि डी पी राठौर ने एल आर जायसवाल को काव्यमय अभिनंदन पत्र भेंट किया। मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ. कुमुदिनी द्विवेदी वाघ, कार्यक्रम के अध्यक्ष भू.पू. शिक्षा मंत्री मेधाराम साहू, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार रामभजन पटेल सोण्डका जिला रायगढ़ के सेवा निवृत्त प्राचार्य, बाराद्वार के प्रतिष्ठित सजलकार राष्ट्रीय कवि संगम सक्ति के जिलाध्यक्ष रमेश सिंघानिया तथा ‘ललितावली’ के रचनाकार एल. आर. जायसवाल इस अवसर पर मंचस्थ रहे। कार्यक्रम का संचालन मंच के सचिव भगतराम साहू ने किया। उपाध्यक्ष चतुर सिंह चंद्रा ने अतिथियों का परिचय तथा स्वागत भाषण दिया। मंच के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने अतिथियों का तिलक-बैज लगाकर पुष्पहार, शाल, श्रीफल और स्वागत-गान से स्वागत किया। तालियों की गड़गड़ाहट और हर्ष ध्वनि के साथ पुस्तक का विमोचन किया गया। काव्य संकलन की समीक्षा शिक्षक सुरेश जायसवाल ने की। विभिन्न विषयों को समाहित किए इस संकलन में रचनाकार की सड़सठ कविताएं शामिल हैं

भूमिका वरिष्ठ सजलकार रमेश सिंघानिया ने लिखी है। मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ कुमुदिनी द्विवेदी वाघ द्वारा अपने संबोधन में पुस्तकों के पठन-पाठन की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए कहा कि यह संग्रह निश्चित रूप से पठनीय है क्योंकि इसमें पौराणिक तथ्यों को आधुनिकता से जोड़कर रचनाकार ने अपनी बात कही है। उन्होंने दिल्ली के ‘निर्भया कांड’ पर अपनी रचना भी पढ़ी। ज्ञात हो कि वे चांपा की साहित्यिक संस्था ‘निराला साहित्य मंडल’ में पदाधिकारी भी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ शासन के भू. पू. शिक्षा मंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा मेरी कविता लेखन में रुचि नहीं है परंतु उनको पढ़ने में बहुत रुचि है। उन्होंने कहा कि कविताओं को पढ़ना और उन्हें प्रस्तुत करना भी कवियों का सम्मान है। इस अवसर पर उन्होंने एक प्रेरक कविता भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ‘ललितावली’ नवहस्ताक्षरों के लिए प्रेरणास्पद होगी। विशिष्ट अतिथि रामभजन पटेल ने कवि जायसवाल की अन्य रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनकी काव्य यात्रा का वर्णन किया और कहा कि यह काव्य संग्रह विद्वत-मंडली में प्रशंसनीय और पाठकों के लिए प्रेरणादायक रहेगा। विशिष्ट अतिथि मंच के संरक्षक बाराद्वार के सजलकार रमेश सिंघानिया ने ‘ललितावली’ की एक कविता ‘मैं की कटुक कहानी’ को आधार बनाकर महाभारत के पात्रों के माध्यम से मैं और हम की व्याख्या करते हुए मैं को दुखदाई और हम को सुखदायक बताया। उन्होंने किताबों का महत्व दर्शाने वाली अपनी कविता प्रस्तुत की जिनकी कुछ पंक्तियाॅं दृष्टव्य हैं मनुज है काॅंच का टुकड़ा, उसे हीरा बनातीं हैं

किताबें मनुज को जीवन, सदा जीना सिखातीं हैं।।”सभी कठिनाइयों का हल, छिपा है इन किताबों में।समाई जो महक इनमें, नहीं गेंदा-गुलाबों में।।”कार्यक्रम को सक्ति के अधिकारी -कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रमेश तिवारी ने भी संबोधित किया। ‘ललितावली’ के रचयिता जिनकी इससे पूर्व तीन रचनाएं ‘सरस्वती चालीसा’, ‘व्यंग्य तरंग’ और ‘वंशावली’ प्रकाशित हो चुकीं हैं ने तुलसी कृत रामचरितमानस को अपना आदर्श ग्रंथ बताते हुए अपने संबोधन में कहा कि मैं नित्य उसका पाठ किया करता हूॅं। उन्होंने कहा कि मानस पढ़ने वाले पाठकों के हृदय में स्वयंमेव कवित्व उपजने लगता है। इसके समर्थन में उन्होंने मैथिली शरण गुप्त की निम्न पंक्तियों को उद्धृत किया-राम तुम्हारा वृत्त स्वयं काव्य है।कोई कवि बन जाए सहज ही संभाव्य है।।”उन्होंने कहा कि उम्र के नवें दशक में भी उनका लिखना जारी है और वे अंतिम सांस तक साहित्य साधना करते रहेंगे।व्यंग्यकार दिनेश पटेल ने अपनी व्यंग्य रचना से सबको हर्षित किया। कार्यक्रम में रचनाकार के परिजन, सांस्कृतिक विकास मंच के पदाधिकारी, सदस्य एवं नागरिक गण बड़ी संख्या में उपस्थित थे जिनमें प्रमुख रूप से भगतराम साहू, दयाराम जायसवाल, रघुनाथ जायसवाल, दिनेश जायसवाल, देवदत्त चंद्रा, हरीश दुबे, चतुर सिंह चंद्रा, डी पी राठौर, रमेश तिवारी, रामनारायण गौतम, श्रीमती हरिमणी जायसवाल, श्रीमती मनीषा जायसवाल, गरिमा श्री जायसवाल, जमुना जायसवाल, नंदिनी सोनी, गंगा यादव, तिलोत्तमा पांडे, रंजनी सोनी, पूजा साहू, टिकेश डनसेना, गिरधारी लाल चौहान, हरिसिंह सिदार, पूर्णानंद गबेल, नरेंद्र वैष्णव, चंद्रिका प्रसाद डनसेना, डी के पाली, तुलसी राठौर आदि शामिल रहे।

जो बीत गया सो बीत गया, आगत का स्वागत करता हूं।चिंतन अतीत का त्याग दिया, अब आज का अर्चन करता हूं- एल आर जायसवाल, साहित्यकार लुन्दराम जयसवाल की कवितावली का हुआ भव्य विमोचन समारोह, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष रमेश सिंघानिया भी रहे मौजूद kshititech
कवितावली का विमोचन समारोह

प्रातिक्रिया दे

Discover more from GL News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading