जामुनः ऐसा वृक्ष जिसके अंग-अंग में औषधि और इतिहास दोनों बसते हैं, जानिए जामुन की लकड़ियां आपके लिए है कितनी फायदेमंद, जमुना में होने वाला आयरन आपके रक्त को करता है शुद्ध


जामुनः ऐसा वृक्ष जिसके अंग-अंग में औषधि और इतिहास दोनों बसते हैं, जानिए जामुन की लकड़ियां आपके लिए है कितनी फायदेमंद
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती-जामुन केवल एक फलदार वृक्ष नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आयुर्वेद और प्राचीन जल-संरक्षण तकनीकों का जीवंत उदाहरण है। इसके फल, पत्ते, छाल और लकड़ी सभी किसी न किसी रूप में औषधीय और उपयोगी माने जाते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह मान्यता रही है कि यदि जामुन की मोटी लकड़ी का टुकड़ा पानी की टंकी में डाल दिया जाए, तो उसमें शैवाल या हरी काई नहीं जमती और पानी लंबे समय तक खराब नहीं होता। यही कारण है कि पुराने समय में जामुन की लकड़ी का उपयोग नाव बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता रहा है।इतिहास इस तथ्य की पुष्टि करता है। पहले के दौर में जब गांवों में कुएँ खोदे जाते थे, तो उनकी तलहटी में जामुन की लकड़ी लगाई जाती थी, जिसे स्थानीय भाषा में “जमोट” कहा जाता है। इसका उद्देश्य जल स्रोत को सड़न और अवरोध से सुरक्षित रखना होता था।दिल्ली स्थित प्रसिद्ध निजामुद्दीन बावड़ी के हालिया जीर्णोद्धार में यह बात सामने आई कि लगभग 700 वर्षों बाद भी वहां जल स्रोत पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के पूर्व प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार, इस बावड़ी की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि आज भी नीचे लगी लकड़ी की तख्तियां सुरक्षित अवस्था में मौजूद हैं। उनके मुताबिक, उत्तर भारत के अधिकांश प्राचीन कुओं और बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी को आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जामुन अत्यंत लाभकारी माना जाता है। विटामिन-C और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस तथा पाचन संबंधी अनेक रोगों के उपचार में बताया गया है।शोधों के अनुसार, जामुन की पत्तियों में एंटी-डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जामुन की पत्तियों से बनी चाय को मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, जामुन की पत्तियों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल तत्व मसूड़ों से खून आने, मुंह के छालों और संक्रमण की समस्याओं में उपयोगी होते हैं। ग्रामीण इलाकों में इसकी पत्तियों और छाल काउपयोग दातुन और औषधीय काढ़े के रूप में भी किया जाता रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि जामुन में मौजूद आयरन रक्त को शुद्ध करने में सहायक है। यही कारण है कि आयुर्वेद में जामुन को केवल एक फल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण औषधीय वृक्ष माना गया है।आज जब आधुनिक समाज प्राकृतिक संसाधनों और आयुर्वेद की ओर पुनः लौट रहा है, तब जामुन जैसा वृक्ष हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति में ही स्वास्थ्य, संरक्षण और समाधान तीनों निहित हैं



