12 सालों बाद भी शक्ति वाले पात्रता हासिल नहीं कर पाए गोंडवाना ट्रेन के ठहराव की



यह साल भी गया- 12 सालों बाद भी शक्ति वाले पात्रता हासिल नहीं कर पाए गोंडवाना ट्रेन के ठहराव की
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती- शक्ति अंचल के रेल यात्री 12 सालों के बाद भी बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलने वाली गोंडवाना एक्सप्रेस के ठहराव की पात्रता हासिल नहीं कर पाए जो कि बड़ा ही दुर्भाग्य जनक लगता है, तथा भारतीय रेलवे ने निजामुद्दीन से बिलासपुर तक लगभग 12 सालों पूर्व गोंडवाना सुपरफास्ट ट्रेन का संचालन प्रारंभ किया था, जिसे बाद में बिलासपुर रेलवे स्टेशन से रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बीच पड़ने वाले स्टेशनों के यात्रियों को सुविधाओं के विस्तार की दिशा में पहल करते हुए इसे बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर ट्रेन के रूप में चलाया गया तथा इस ट्रेन का स्टॉपेज बिलासपुर से निकलकर अकलतरा,चाम्पा, खरसिया रायगढ़ में दिया गया, किंतु शक्ति अंग्रेज जमाने के समय से बड़ा रेलवे स्टेशन होने के बावजूद यहां के लोगों को इस ट्रेन के ठहराव के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया
रेलवे ने कहा- शक्ति पात्र नहीं है गोंडवाना के ठहराव के लिए
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न संस्थाओं के लोगों ने जब रेलवे से इस ठहराव के संबंध में कुछ वर्षों पूर्व जानकारी मांगी तो रेलवे ने लिखित में दिया की शक्ति रेलवे स्टेशन इस ट्रेन के ठहराव की पात्रता नहीं रखता, क्या शक्ति रेलवे स्टेशन एक पैसेंजर ट्रेन के ठहराव की पात्रता नहीं रखता, जो कि बड़ा ही चिंताजनक विषय है, शक्ति अंचल के रेल यात्रियों को गोंडवाना जैसे ट्रेन की ठहराव की सुविधा नहीं मिली तो फिर भला यहां के रेल यात्री अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों के स्टॉपेज की ठहराव की कल्पना भी कैसे कर सकते हैं
नेताओं ने समय-समय पर रखी ट्रेन के स्टॉपेज की मांग
स्थानीय नेताओं ने ट्रेनों के ठहराव को लेकर ऊपर तक के नेताओं एवं रेलवे के अधिकारियों तक बात तो जरूर रखी, किंतु ऐसा लगता है की शक्ति के लोगों द्वारा ऊपर तक पहुंचाई गई बातें अनसुनी कर दी गई
रेल प्रतीक्षालय भी नहीं है शक्ति रेलवे स्टेशन में
वही साल 2025 भी विदा होने वाला है एवं शक्ति रेलवे स्टेशन में आज रेल यात्रियों के लिए एक प्रतीक्षालय तक नहीं है, दशकों पूर्व जो प्रतीक्षालय बनाया गया था उसमें रेलवे के अधिकारियों का कब्जा बना हुआ है, जिसमें की लगातार आम नागरिकों के लिए ताला लगा रहता है, एवं किसी रेल यात्री को यदि आकस्मिक कुछ आवश्यकता पड़ जाए तो उसे प्लेटफार्म पर ही रुकना पड़ेगा, किंतु ऐसा लगता है कि रेलवे प्रशासन को इन सब बातों से कोई लेना-देना नहीं है
स्थानीय रेल सलाहकार समिति बनने के बावजूद नहीं मिल रही सुविधाएं
भारतीय रेलवे के निर्देशानुसार शक्ति रेलवे स्टेशन में स्थानीय रेल सलाहकार समिति का भी स्थानीय स्तर पर गठन किया गया है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस समिति की एक भी बैठक नहीं हो पाई तथा स्थानीय रेलवे समिति के गठन की उद्देश्यों की पूर्ति भी नहीं हो पा रही है,किंतु इसके बावजूद शक्ति के रेल यात्री बड़े ही शांति प्रिय हैं एवं अपनी मांगों को बड़े ही सरल तरीके से अपने नेताओं तक रखते जरूर हैं किंतु कभी भी शक्ति के रेल यात्रियों ने नकारात्मक सोच के साथ कार्य नहीं किया है
कुली तक उपलब्ध नहीं है शक्ति रेलवे स्टेशन में
रेल यात्रियों की माने तो शक्ति के रेलवे स्टेशन में कुली तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तथा लंबी सुपरफास्ट ट्रेनों से आने वाले रेल यात्रियों को जहां अपना भारी भरकम सामान स्वयं रेलवे द्वारा बनाए गए लंबे चौड़े रेम्प से लेकर निकलना पड़ता है, जिससे रेल यात्रियों की हालत ही पस्त हो जाती है
दिव्यांग एवं असहाय यात्रियों के लिए नहीं है कोई सुविधा
तो वहीं शक्ति रेलवे स्टेशन में तो दिव्यांग रेल यात्रियों एवं बुजुर्ग जन् रेल यात्रियों के लिए स्टेशन के बाहर से प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते इस श्रेणी के लोगों ने तो अधिकांशत रेलवे मार्ग की यात्रा छोड़कर सड़क मार्ग की ही यात्रा अपना ली है
अंग्रेजों के चलते शक्ति में हुआ मुंबई हावड़ा मेल का स्टॉपेज-सूत्र
शक्ति का रेलवे स्टेशन अंग्रेज जमाने से बड़ा स्टेशन रहा है, जहां की अंग्रेजो के लगातार आना-जाना करने के चलते यहां मुंबई हावड़ा मेल जैसी सुपरफास्ट ट्रेनों का स्टॉपेज दिया गया तथा विगत वर्षों में नई ट्रेनों के ठहराव की बात करें तो शक्ति रेलवे स्टेशन में एक भी यात्री ट्रेनों का ठहराव नहीं दिया गया तथा स्थानीय सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर अपनी बातों को रखती रही किंतु हमेशा ही बातों को अनसुना किया जाता रहा जिसके चलते आज शक्ति के रेल यात्री अपने आप को कहीं ना कहीं उपेक्षित महसूस कर रहे हैं
रेल ओवर ब्रिज का प्रारंभ नहीं हुआ निर्माण
शक्ति रेलवे स्टेशन के कुछ दूरी पर ही विगत वर्षों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल रूप से दो नए रेल ओवर ब्रिज निर्माण की आधारशिला रखी गई थी, किंतु यह दुर्भाग्य है कि आज आधारशिला भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा रखे जाने के बावजूद उसका कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया तथा इसके लिए दोषी कौन है,यह तो रेलवे प्रशासन ही जाने, किंतु क्या शक्ति के नागरिकों एवं यहां की जनता को रेलवे एक ओवर ब्रिज बनाकर भी नहीं दे सकता यह बहुत बड़ा सवाल है
पर्याप्त शेड की भी सुविधा नहीं है शक्ति रेलवे स्टेशन में
शक्ति के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक एवं प्लेटफार्म नंबर दो पर वर्षों से नए शैड निर्माण की मांग की जा रही है, तथा वर्तमान में जो शेड बने हुए हैं उसमें थोड़ी सी बारिश में ही शैड में से ही पानी टपकने लगता है तथा रेल यात्री अपने आप को सुरक्षित करने के लिए यत्र- तत्र भटकते नजर आते हैं, तथा रेलवे द्वारा आज तक नए शेड का भी निर्माण नहीं किया गया है, किंतु रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष सार्वजनिक किए जाने वाले अपने आंकड़ों में शक्ति रेलवे स्टेशन को एक नंबर का रेलवे स्टेशन बताते हुए सभी सुविधाओं में दुरुस्त होने की भी बात कही जाती है, किंतु शक्ति का रेलवे स्टेशन कितना दुरुस्त है, इसे तो रेलवे के बड़े अधिकारियों को आकर स्वयं देखना चाहिए तथा कुछ घंटे यहां रुकना चाहिए एवं रेल यात्रियों से पूछना चाहिए, तब पता चलेगा की शक्ति का रेलवे स्टेशन कितना दुरुस्त है



