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शक्ति जिले का नया कलेक्ट्रेट कार्यालय बनेगा शक्ति में, सत्ता बदलते ही बदले समीकरण

शक्ति जिले का नया कलेक्ट्रेट कार्यालय बनेगा शक्ति में, सत्ता बदलते ही बदले समीकरण

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति- छत्तीसगढ़ प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेसनीत भूपेश बघेल की सरकार ने राज्य में नए जिलों का गठन किया, जिसमें जांजगीर-चांपा से अलग होकर शक्ति जिला 9 सितंबर 2022 को अस्तित्व में आया, शक्ति जिले के अस्तित्व में आने के बाद जेठा में स्थित शासकीय क्रांति कुमार भारतीय महाविद्यालय के भवन में जहां नए कलेक्ट्रेट कार्यालय का अस्थाई शुभारंभ किया गया तो वहीं कलेक्ट्रेट कार्यालय के जेठा में शुभारंभ को लेकर ही विवादों की स्थिति बनी रही, तथा शक्ति जिले की 15 अगस्त 2021 को घोषणा के बाद से ही जांजगीर चांपा जिले के तत्कालीन कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने जिले भर के नेताओं एवं अधिकारियों से रायशुमारी कर जेठा के शासकीय क्रांति कुमार भारतीय महाविद्यालय को ही अस्थाई कलेक्ट्रेट करने के रूप में प्रारंभ करने की सहमति प्रदान कर दी थी

उस समय तत्कालीन छत्तीसगढ़ की विपक्षी की भूमिका निभा रही भारतीय जनता पार्टी ने जहां विभिन्न माध्यमों से इसका पुरजोर विरोध किया, तो वहीं कांग्रेस पार्टी मौन होकर पूरे कार्य को करती रही, तथा कांग्रेस ने अस्थाई कार्यालय की जगह को लेकर जहां किसी भी प्रकार का कोई बयान देना ही उचित नहीं समझा तो वही तत्कालीन शक्ति के विधायक एवं छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरण दास महंत ने भी अनौपचारिक रूप से जेठा में अपनी स्वीकृति प्रदान करते हुए इस कार्यालय का शुभारंभ करवाया, तो वहीं बाराद्वार शहर के नागरिकों ने भी एक बैठक आहुत कर जेठा की जगह को ही उपयुक्त बताते हुए जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन का आभार व्यक्त किया, किंतु शक्ति एवं शक्ति से लगे दो अन्य विधानसभा क्षेत्र के लोगों को जेठा का कार्यालय नागवार गुजर रहा था, क्योंकि चंद्रपुर विधानसभा एवं जैजैपुर विधानसभा के लोगों के लिए शक्ति शहर सहित आसपास के क्षेत्र में ही कलेक्ट्रेट कार्यालय होने से ज्यादा सुविधा रहती, इस बात को लेकर लोग कयास लगा रहे थे किंतु इसके बावजूद जिले की तत्कालीन ओएसडी एवं प्रथम जिलाधीश के रूप में नियुक्त की गई इस श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने अपनी कुशल क्षमता से समन्वय बनाकर सभी राजनीतिक दलों को एक सूत्र में पिरोकर जिला गठन के बाद से ही निरंतर पूरे जिले में प्रशासन की ओर से कहीं कोई विवादों की स्थिति निर्मित नहीं होने दी, किंतु अब 2023 के विधानसभा चुनाव में राज्य में सत्ता का समीकरण बदल चुका है, तथा तत्कालीन जिला गठन के समय स्थान का विरोध करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब सत्ता में आ चुकी है तथा अब भाजपा के नेता भी इस बात को लेकर दबी जुबान से बोलने लगे हैं कि अब नया कलेक्ट्रेट कार्यालय शक्ति में ही बनेगा तथा नेताओं ने नए कलेक्ट्रेट करने के लिए जगह की तलाश भी चालू कर दी है तथा अब पूरे क्षेत्र वासियों को उम्मीद है कि जो कलेक्ट्रेट कार्यालय अस्थाई रूप से जेठा में प्रारंभ हुआ था वह स्थाई रूप से अब शक्ति में ही बनेगा

तथा भारतीय जनता पार्टी ने जहां तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार की अनेकों नीतियों का विरोध भी किया था तथा भाजपा ने बुधवारी बाजार क्षेत्र में जिला प्रशासन एवं नगर पालिका द्वारा हटाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में भी नगर पालिका के सामने धरना देकर इसका विरोध करते हुए गरीब लोगों के आशियांने एवं दुकानों को तोड़े जाने की निंदा की थी, तथा भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेताओं को इस बात की जानकारी भी दी थी किंतु उसे समय भाजपा सत्ता में नहीं थी किंतु आज भाजपा सत्ता में आ गई है तो अब ऐसे अतिक्रमण से प्रभावित लोगों को भी उम्मीदें जगी हैं कि भाजपा उनके लिए कुछ न कुछ करेगी किंतु यह तो आने वाला समय ही बताया कि भारतीय जनता पार्टी आम जनता के हित में कितना कार्य करती है

देखा जाए तो साल 2012 में जब छत्तीसगढ़ में डॉक्टर रमन सिंह की सरकार थी तब तत्कालीन आईएएस प्रशिक्षु एसडीएम कार्तिकेय गोयल ने शहर में बृहद रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर तोड़फोड़ की थी, जिसे सैकड़ो परिवार एवं छोटे-बड़े दुकानदार प्रभावित हुए थे, किंतु भारतीय जनता पार्टी ने उस समय इस तोड़फोड़ अभियान को लेकर कोई विशेष इसका विरोध नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को तोड़फोड़ अभियान की व्यापकता से अवगत जरूर कराया था, तथा अभियान को सामान्य रूप से करने का आग्रह भी किया था,किंतु तत्कालिन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने मिलने गए भाजपा के नेताओं को यह कह दिया कि यह तो प्रशासन कर रहा है, एवं कलेक्टर अपने हिसाब से कार्य करते हैं, किंतु तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष नरेश गेवाड़ीन ने किसका विरोध करते हुए नगर पालिका परिषद की बैठक में ही यह निर्णय पारित किया था कि हम तोड़फोड़ अभियान के पक्ष में नहीं है, किंतु तत्कालीन परिस्थितियों के चलते नगर पालिका अध्यक्ष भी अपने आप को असहाय महसूस करने लगे, जिसके चलते यह अभियान सफल हुआ, किंतु क्या आने वाले समय में फिर भारतीय जनता पार्टी ऐसे अतिक्रमण अभियान को लेकर अपना समर्थन देगी या की लोगों के हित में काम करेगी

वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो शक्ति शहर में केवल प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान से लोग बेसहारा हो गए है, किंतु प्रशासन ने कभी भी ऐसे लोगों को पुनः स्थापित करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस- भाजपा सभी दलों ने राज किया, किंतु शक्ति शहर के इतिहास में तो गरीबों के लिए किसी भी सरकार ने कुछ नहीं किया, तथा आज भी शहर के ऐसे सैकड़ो परिवार अपनी रोजी-रोटी को तरस रहे हैं, किंतु स्थानीय प्रशासन एवं सरकारों को इससे कोई लेना-देना नहीं है

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