छोटी गलतियों पर अब जेल नहीं सिर्फ लगेगा जुर्माना. लोकसभा में पेश हुआ विधेयक. लोगों को मिलेगी राहत. अदालतो में मामलों के बोझ को कम करने के लिए हुआ यह बड़ा फैसला. मोटर व्हीकल एक्ट सहित 23 मंत्रालयों के विषयों पर होगा बड़ा संशोधन



छोटी गलतियों पर अब जेल नहीं सिर्फ लगेगा जुर्माना. लोकसभा में पेश हुआ विधेयक. लोगों को मिलेगी राहत. अदालतो में मामलों के बोझ को कम करने के लिए हुआ यह बड़ा फैसला
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -केंद्र सरकार ने नियमों को आसान बनाने और छोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शुक्रवार को जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया। इस विधेयक के तहत 23 मंत्रालयों के अधीन आने वाले 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रविधानों में संशोधन प्रस्तावित है।इनमें 717 प्रविधानों में कई छोटे और तकनीकी उल्लंघनों पर जेल की सजा की जगह जुर्माना या चेतावनी दी जाएगी। वहीं 67 प्रविधान ऐसे हैं जो सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए बदले जा रहे हैं।राष्ट्रीय सुरक्षा, श्रम कानून, सेना और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से जुड़े मामलों को इस कानून से बाहर रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून कारोबार और आम जीवन को सरल बनाएगा, जबकि विपक्ष ने इसे लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को यह बिल पेश किया। यह विधेयक पहले 2025 में लाया गया था, जिसे संशोधन के लिए चयन समिति को भेजा गया था। समिति की सिफारिशों के बाद इसे वापस लेकर अब नए रूप में पेश किया गया है।इससे पहले 2023 में भी जन विश्वास कानून के तहत 42 केंद्रीय कानूनों के 183 प्रावधानों को डिक्रिमिनलाइज किया गया था।सबसे अहम बदलाव मोटर वाहन कानून में प्रस्तावित है।सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता खत्म होने के बाद 30 दिन की ग्रेस पीरियड का प्रस्ताव रखा है। इस दौरान लाइसेंस वैध माना जाएगा। अभी तक लाइसेंस खत्म होते ही अमान्य हो जाता था। इसी तरह कोई व्यक्ति अगर समय पर नवीनीकरण नहीं करा पाता है तो अब लाइसेंस की वैधता नवीनीकरण की तारीख से मानी जाएगी, न कि पुरानी समाप्ति तिथि से। इससे लाखों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।वाहन पंजीकरण से जुड़े नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। अब गाड़ी का रजिस्ट्रेशन पूरे राज्य में कहीं भी कराया जा सकेगा, न कि किसी खास क्षेत्राधिकार तक सीमित रहेगा। साथ ही वाहन पंजीकरण रद्द करने की सूचना देने एवं बीमा ट्रांसफर की जानकारी देने की समय सीमा दो सप्ताह से बढ़ाकर कम से कम 30 दिन करने का प्रस्ताव है।सरकार का कहना है कि यह बिल जन विश्वास की दिशा में बड़ा कदम है। छोटे उल्लंघनों पर जेल की सजा हटाकर आर्थिक दंड और चेतावनी की व्यवस्था की जाएगी। पहली बार गलती होने पर चेतावनी और दोबारा उल्लंघन पर जुर्माना लगाने का प्रविधान होगा।इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ भी कम होगा, क्योंकि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निर्णायक अधिकारी और अपीलीय प्राधिकरण बनाने की व्यवस्था भी की जाएगी। विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया है। कांग्रेस सांसदों का तर्क है कि जेल की सजा हटाकर केवल जुर्माना करने से भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।
साथ ही यह संविधान की मूल भावना के भी खिलाफ है। कांग्रेस ने इसे फिर से संसदीय समिति के पास भेजने का सुझाव दिया है, मगर सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केवल छोटे और प्रक्रियात्मक मामलों में ही यह बदलाव किया जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि नए बदलावों से नियमों का पालन आसान होगा, निवेश बढ़ेगा और मुकदमों का बोझ घटेगा।वहीं विपक्ष का कहना है कि सजा कम करने से जवाबदेही कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में अब इस बिल पर संसद में होने वाली चर्चा तय करेगी कि यह सुधार व्यवस्था को सरल बनाएगा या नए विवाद खड़े करेगा।


