पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई इजराइल ने- पहली बार इजराइल खुल कर आया सामने। पाकिस्तान को दी नसीहत। कहा अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग कूटनीति को करता है कमजोर. मामला यहूदी देश को कैंसर कहने का



पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई इजराइल ने- पहली बार इजराइल खुल कर आया सामने। पाकिस्तान को दी नसीहत। कहा अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग कूटनीति को करता है कमजोर
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति-अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की चर्चा के बीच इजरायल ने पाकिस्तान के यहूदी देश को कैंसर कहने वाले बयान पर जोरदार पलटवार किया है. अब तक पाकिस्तान पर टिप्पणी करने से बचने वाले इजरायल पहली बार खुलकर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उसे आतंकी देश बता दिया है. ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ की भूमिका में पेश करने की कोशिश कर रहा था. लेकिन इसी बीच एक ऐसा बयान सामने आया, जिसने पूरे समीकरण को बदलकर रख दिया. दरअसल, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में इजरायल को ‘कैंसरग्रस्त’ कह दिया था. पाकिस्तान के इस बयान पर इजरायल भड़क उठा.
पाकिस्तान के इस बयान पर इजरायल को यह टिप्पणी न सिर्फ अपमानजनक लगी, बल्कि ऐसे समय में बेहद गैर-जिम्मेदाराना भी, जब पाकिस्तान खुद शांति स्थापित करने की बात कर रहा है.इजरायल ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कर दिया कि इस तरह की भाषा किसी भी तरह की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर करती है. उसने यह भी संकेत दिया कि अगर कोई देश सच में मध्यस्थ बनना चाहता है, तो उसे निष्पक्ष और संतुलित रवैया अपनाना होगा. इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं. एक तरफ वह शांति वार्ता की बात करता है, तो दूसरी तरफ उसके शीर्ष नेता के बयान से माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो जाता है.पाकिस्तान के रक्षामंत्री आसिफ के तीखे शब्दों पर बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कड़ी आपत्ति जताई. इजरायली पीएम कार्यालय ने साफ कहा कि किसी भी देश द्वारा इजरायल के विनाश की बात करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य भी है. खासकर तब, जब वही देश खुद को शांति का निष्पक्ष मध्यस्थ बताने की कोशिश करता है. इस बीच, ईरान की सरकारी मीडिया संस्था तस्नीम न्यूज एजेंसी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी. एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता को फिलहाल रोक दिया गया है. यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक इजरायल लेबनान में अपने सैन्य अभियान को बंद नहीं करता. इस घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट की पहले से ही जटिल स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है, जहां हर बयान और प्रतिक्रिया कूटनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल रही है



