सक्ती जिले में हॉस्टल बच्चों की सुविधाओं को पलीता लगा रहे अधिकारी- कर्मचारी, नही सुधर रही जैजैपुर क्षेत्र के छात्रावास एवं आश्रमों की व्यवस्था,बच्चो को दी जाने वाली मध्यान्ह भोजन में नहीं होता मीनू का पालन, शक्ति जिले के अनेकों विकासखंडों में छात्रावासों में हो रही भारी अनियमितताएं, विभाग के सहायक आयुक्त कहते हैं हम कर रहे हैं सतत दौरा


सक्ती जिले में हॉस्टल बच्चों की सुविधाओं को पलीता लगा रहे अधिकारी- कर्मचारी, नही सुधर रही जैजैपुर क्षेत्र के छात्रावास एवं आश्रमों की व्यवस्था,बच्चो को दी जाने वाली मध्यान्ह भोजन में नहीं होता मीनू का पालन, शक्ति जिले के अनेकों विकासखंडों में छात्रावासों में हो रही भारी अनियमितताएं, विभाग के सहायक आयुक्त कहते हैं हम कर रहे हैं सतत दौरा
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती- शक्ति जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग से संचालित लगभग 60 से अधिक आश्रम एवं छात्रावास संचालित हो रहे है, उनमें रह रहे छात्रों को समस्त प्रकार की दी जाने वाली सुविधाओं के लिए शासन द्वारा करोड़ो रुपए का बजट दिया जाता है, उनको संचालित करने वाले अधीक्षक लाखो रुपए का बजट डकार रहे है।उदाहरण के तौर पर नवीन जिला सक्ती अंतर्गत जैजैपुर क्षेत्र में ही लगभग 18 से 20 छात्रावास एवं आश्रम संचालित हो रहें हैं,सूत्रों के अनुसार जैजैपुर क्षेत्र के अधिकाशं छात्रावासों की व्यवस्थाएं बद से बदत्तर है। प्री मैट्रिक हो या आश्रम में कही 50 सीटे है, तो कहीं 80 लेकिन वर्तमान में इन जगहों जैसे कचंदा, कूटराबोर,अकलसरा, दतोद, हरेठीकला, जैसे छात्रावास वा आश्रमों में बच्चों की उपस्थित नहीं के बराबर रहती हैं, किसी में15 तो किसी में 2-4छात्र ही उपस्थित रहते हैं, तथा बाकी अनुपस्थित छात्र, छात्रों की फर्जी दर्ज कर शासन से मिलने वाली संसाधनों की उपयोग कर रहे है, अधिकांश छात्रावास एवं आश्रमो में बच्चों को दी जाने वाली मध्यान भोजन में में भी मीनू का पालन नहीं होता एवं अधीक्षक अधिकतर समय नदारत रहते हैं
वही शक्ति विकासखंड में भी अधिकाँशत छात्रावासों में ना तो स्वछता का ध्यान रखा जाता, नहीं पूरे छात्रावास परिसर को बेहतर सुविधाएं देने के मामले में कोई पहल की जाती है,तथा इस संबंध में आदिम जाति कल्याण विकास विभाग शक्ति जिले के आयुक्त से पूछे जाने पर वह एक टका सा जवाब देते हैं कि हम तो पूरे जिले में सतत दौरा करते हैं, तथा किसी भी प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई भी करते हैं,सहायक आयुक्त जी जिले में नियमित रूप से अगर दौरा करते तो ऐसा नहीं लगता कि इस ऐसी स्थितियां निर्मित होती, आज छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उक्त विभाग को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट वहां रह रहे विद्यार्थियों की सुविधाओं के एवज में दिया जाता है, किंतु शक्ति जिले में विभाग की उदासीनता से देखकर ऐसा नहीं लगता कि शासन के बजट का सदुपयोग किया जा रहा है,अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में एयर कंडीशनर में बैठकर अपना पूरा समय निकाल देते हैं, तथा औपचारिकता के लिए कभी कभार क्षेत्र में दौरे में जाते हैं
शक्ति शहरी क्षेत्र में ही उक्त विभाग के दशकों पूर्व से कसेर पारा में संचालित हॉस्टल की बात करें तो बाहर से देखने से ऐसा लगता है कि हॉस्टल खंडहरनुमा है,आज शक्ति जिले के विभिन्न विकासखंडों में शासन द्वारा विगत वर्षों में एक-एक हॉस्टल्स को करोड़ों- करोड़ों की लागत से बनाया गया है, किंतु आवश्यक रखरखाव के आभाव में आज कुछ सालों पूर्व बने हॉस्टलों की स्थिति जाकर देखी जा सकती है, कि आज वह किस स्थिति में है,कहीं ना कहीं संबंधित विभाग की उदासीनता एवं छात्रावास अधीक्षकों की लापरवाही से यह स्थिति निर्मित हो रही है, तथा शासन द्वारा तो प्रत्येक छात्रावास के बच्चों के लिए वर्ष भर के लिए शेड्यूल बनाकर सुविधा देने का प्रावधान है,किंतु आज इन सुविधाओं को पलीता लगाने में संबंधित विभाग के अधिकारी- कर्मचारी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं,अधिकारी कहते है कि आज शक्ति जिले में उक्त विभाग के अंतर्गत संचालित किसी भी छात्रावास में कोई कमी नहीं है, किंतु आज संबंधित विभाग के उच्च स्तर के अधिकारी अगर जाकर छात्रावासों की स्थिति देखें तो समझ में आ जाएगा कि आज शक्ति जिले के उक्त विभाग के बड़े अधिकारियो की बातों की सच्चाई क्या है