एक मां की तरह है हिंदी, इसी में समाहित है सभी भाषाएं-उषा केडिया, कर्नाटक मैसूर के साहित्य मधुशाला की संस्थापक उषा केडिया ने हिंदी दिवस पर प्रस्तुत की अपनी भावनाएं, साहित्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति अर्जित कर चुकी हैं उषा


एक मां की तरह है हिंदी, इसी में समाहित है सभी भाषाएं-उषा केडिया, कर्नाटक मैसूर के साहित्य मधुशाला की संस्थापक उषा केडिया ने हिंदी दिवस पर प्रस्तुत की अपनी भावनाएं
मैसूर कर्नाटक से कन्हैया गोयल की विशेष खबर
मैसूर-14 सितंबर को जहां पूरे देश में हिंदी दिवस के रूप में इसे मनाया जाता है, तथा हिंदी हमारी मातृभाषा एवम राष्ट्रभाषा है एवं आज हिंदुस्तान में हिंदी को लेकर सरकारों ने भी जहां सरकारी कामकाजों में इसका अधिक से अधिक उपयोग करने पर जोर दिया है, तथा हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट जैसे बड़े न्यायिक संस्थाओं में भी कामकाज को अधिकाधिक हिंदी में ही करने का प्रयास किया जा रहा है, तो वहीं 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर कर्नाटक मैसूर की प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं साहित्य मधुशाला की संस्थापक अध्यक्ष तथा क्रिएटिविटी कैफे की डायरेक्टर श्रीमती उषा जैन केडिया ने भी हिंदी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपनी भावनाएं पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त की हैं, तथा श्रीमती उषा केडिया ने भी समस्त देशवासियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं
हिंद महासागर के हृदय से निकली, बनी वह राष्ट्रभाषा शंखनाद सी ध्वनि है गूँजती है सम्पूर्ण राष्ट्र में
एक माँ की तरह है हिंदी, जिसमें समाहित हो जाती हर भाषाएं, अभिव्यक्ति को वह चित्रित कर सम्मुख लाती है कोरे कागज पर
म संग आ और चंद्र बिंदु मिल बन जाती है माँ जिसमें समा जाती है पूरी सृष्टि
दौहा, चौपाई की साड़ी पहनकर वो आती है रस, छंद अलंकार के गहनो से खूब सज जाती है दुल्हन के लिबास में चौदह सितम्बर को आती है हर जगह अपनी छँटा वो दिखलाती


