20 लाख का सालाना पैकेज छोड़कर जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण कर साध्वी बनेगी पलक. आध्यात्मिक जीवन जीने का लिया संकल्प. 12 अप्रैल को लिया फैसला. 23 अप्रैल को संपन्न होगी पालक की जैन धर्म की दीक्षा



20 लाख का सालाना पैकेज छोड़कर जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण कर साध्वी बनेगी पलक. आध्यात्मिक जीवन जीने का लिया संकल्प. 12 अप्रैल को लिया फैसला
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -जहां युवा बेहतर करियर और ऊंचे पैकेज की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं नारनौल की पलक ने एक अलग राह चुनकर सबको चौंका दिया है। 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का फैसला किया है। रविवार सुबह करीब 9 बजे पलक अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों को अलविदा कहकर दिल्ली के लिए रवाना हो गईं, जहां 23 अप्रैल को वह जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण करेंगी।पलक का यह फैसला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका कहना है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है और इसके लिए कठोर साधना और नियमों का पालन जरूरी है। यही सोच उन्हें इस मार्ग पर ले आई। श्वेतांबर स्थानकवासी जैन सभा सचिव मुकेश जैन के मुताबिक पलक ने जैन दीक्षा लेने का निर्णय लिया है और वह गुरुनी भाग्यप्रभा महाराज के सानिध्य में पहुंच चुकी हैं। 23 अप्रैल को उनकी दीक्षा संपन्न होगी।पलक पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रही हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से गणित आनर्स में टाप किया और हाल ही में एक प्रतिष्ठित कंपनी में करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी भी हासिल की थी। लेकिन भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी। दीक्षा के बाद पलक एक वर्ष तक मौन रहकर जैन आगमों का गहन अध्ययन करेंगी। इस दौरान उन्हें कठोर नियमों का पालन करना होगा। श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा में साध्वी जीवन बेहद अनुशासित और त्यागपूर्ण माना जाता है



