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धान बेचने में किसानों को हो रही परेशानी, किसान कांग्रेस कमेटी के शक्ति जिला अध्यक्ष साधेश्वर गबेल ने कहा- हाल बेहाल है व्यवस्था का,गबेल ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर साधा निशाना,

धान बेचने में किसानों को हो रही परेशानी, किसान कांग्रेस कमेटी के शक्ति जिला अध्यक्ष साधेश्वर गबेल ने कहा- हाल बेहाल है व्यवस्था का,गबेल ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर साधा निशाना, kshititech
किसान कांग्रेस कमेटी शक्ति जिले के अध्यक्ष साधेश्वर प्रसाद गबेल

धान बेचने में किसानों को हो रही परेशानी, किसान कांग्रेस कमेटी के शक्ति जिला अध्यक्ष साधेश्वर गबेल ने कहा- हाल बेहाल है व्यवस्था का,गबेल ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर साधा निशाना

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती-किसान कांग्रेस कमेटी सक्ती जिले के अध्यक्ष साधेश्वर गबेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्तमान में धान खरीदी की व्यवस्था चरमरा गई है,तथा किसान धान की मिसाइ कर अपने घर में ही धान की रखवाली कर रहा है,तथा ना ही टोकन कट पा रहे हैं, और ना हीं किसानों का धान समय पर समितियो में बिक्री हो रहा है, तथा किसान जब धन लेकर समितियो में जा रहे हैं तो वहां प्रति कट्टा तीन से चार रुपए की वसूली की जा रही है, एवं 10 से 12 रुपए प्रति क्विंटल की मांग की जा रही है, जिस पर किसान हलकान हो चुका है एवं विगत 18 नवंबर 2025 को शक्ति के विधायक एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दास महंत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इस बात से अवगत कराया था कि आज समितियो में धान बिक्री के नाम पर हो रही अवैध उगाही से किसान परेशान है, तथा यह अवैध उगाही तत्काल बंद होनी चाहिए, किंतु इसके बावजूद सरकार ने ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा आज पूरे प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं

किसान कांग्रेस कमेटी शक्ति जिला अध्यक्ष साधेश्वर गबेल ने कहा कि विगत कोरोना के काल में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के किसानों का धान एक मुश्त ₹2500 में खरीदा एवं किसानों का कर्ज माफ किया, बिजली बिल को हाफ किया, किंतु आज प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद सारी व्यवस्थाएं बदल गई है, एवं राज्य की जनता को जो सपने 2023 के चुनाव में दिखाए गए वे सपने ओझल हो चुके हैं,तथा प्रदेश की जनता एवं किसान आज पछतावा कर रहा है, किंतु इस पछतावा से कोई फायदा नहीं है,श्री गबेल ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में जब कृषि का कार्य प्रारंभ हुआ तब प्रदेश में यूरिया एवं डीएपी खाद को लेकर कितनी अव्यवस्था हुई एवं महंगे दामों पर किसानों को खाद खरीदना पड़ा, क्योंकि उन्हें अपनी फसल लगानी थी, एवं समय पर यदि वे खाद नहीं लेते तो आज उनकी फसल नहीं होती, किंतु आज खाद की तत्कालीन कालाबाजारी को लेकर पूरे देश में आज इस बात की चर्चा हुई एवं समय पर आज किसानों को खाद मुहैया नहीं हो पाया तथा ऊंट के मुंह में जीरा वाला कहावत खाद वितरण के समय देखने को मिली, जब गांव की समितियो में जहां 500 बोरी खाद की मांग थी, तो वहां 100 बोरे खाद उपलब्ध होते थे,जिससे किसान खाद को लेने के लिए लाइनों में लगकर आपस में लड़ते-झगडते थे, किंतु आज छत्तीसगढ़ की सरकार को यह सभी दिख नहीं रहा है, एवं किसान हित की बात करने वाली यह सरकार आज बैक फुट पर आ गई है

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