छत्तीसगढ़ शासन योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा एवं मलूकद्वीप आश्रम के महाराज का बाराद्वार एवं कुम्हारी कला में हुआ भव्य स्वागत,बाराद्वार शहर में नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ता स्वागत करने




छत्तीसगढ़ शासन योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा एवं मलूकद्वीप आश्रम के महाराज का बाराद्वार एवं कुम्हारी कला में हुआ भव्य स्वागत
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ति-छत्तीसगढ़ शासन योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा एवं मलूकद्वीप आश्रम के महाराज जी का बाराद्वार व कुम्हारी कला में भव्य स्वागत किया गया। दोनों विशिष्ट अतिथि दोपहर 2 बजे बाराद्वार रेस्ट हाउस पहुंचे, जहाँ उनके आगमन पर आतिशबाजी कर उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया।रेस्ट हाउस में स्वागत हेतु नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे, मुख्यमंत्री प्रशंसक फोरम के प्रदेश अध्यक्ष जगेश राय, अरविंद तिवारी समाजसेवी , बाराद्वार मंडल अध्यक्ष गेंद राम मनहर ,सांसद प्रतिनिधि अमित कलानोरिया, पार्षद ॐ प्रकाश कुर्रे, अनिल यादव, राजेश साहू, पवन अग्रवाल, महावीर राठौर, पंकज अग्रवाल, शंकर दास महंत, कीर्ति सागर बरेठ, मोतीलाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।रेस्ट हाउस में हुई चर्चा-परिचर्चा रेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ हुई चर्चा बेहद सकारात्मक और जनहित पर केंद्रित रही। इस दौरान रूपनारायण सिन्हा ने क्षेत्र में योग व स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, युवाओं को नशामुक्ति व कौशल विकास की दिशा में प्रेरित करने तथा ग्राम स्तर पर योग शिविरों के विस्तार पर जोर दिया।कार्यकर्ताओं ने आगामी सामाजिक कार्यक्रमों पर भी अपने सुझाव रखे। चर्चा में सामाजिक समरसता और सामुदायिक सहयोग को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। अतिथियों नेकार्यकर्ताओं के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास में सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।इसके उपरांत दोनों अतिथि ग्राम कुम्हारी कला पहुंचे, जहाँ उन्होंने शहीद मनोज बरेठ की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके पश्चात कुम्हारी निवासी बुधराम बरेठ के घर पहुँचकर उनके दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।दौरे के दौरान उन्होंने शहीद मनोज बरेठ के परिवारजनों से भी भेंट की और उनका कुशलक्षेम जाना। तत्पश्चात भोजन ग्रहण कर, उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं से फिर से चर्चा परिचर्चा करते हुए अपनी बातों से कार्यकर्ताओं को कार्य के प्रति समर्पण से सफलता के अनेकों उदाहरण देते हुए सभी को ईमानदारी से अपने दायित्वों को निभाने की बातें कही




