कांग्रेस का आरोप-भाजपा झीरम के सच को सामने लाना ही नहीं चाहती.एमआईए की जांच पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल।झीरम घाटी हत्याकांड के आए फैसले पर कांग्रेस शक्ति ने करी पत्रकार वार्ता. कांग्रेस अध्यक्ष रश्मि ने कहा- यह आधा अधूरा न्याय. 6 सितंबर को रेस्ट हाउस में संपन्न हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस. शक्ति जिला कांग्रेस के पदाधिकारी भी रहे मौजूद






कांग्रेस का आरोप-भाजपा झीरम के सच को सामने लाना ही नहीं चाहती.एमआईए की जांच पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल।झीरम घाटी हत्याकांड के आए फैसले पर कांग्रेस शक्ति ने करी पत्रकार वार्ता. कांग्रेस अध्यक्ष रश्मि ने कहा- यह आधा अधूरा न्याय. 6 सितंबर को रेस्ट हाउस में संपन्न हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर झीरम घाटी हत्याकांड के आए फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने प्रत्येक जिला मुख्यालयो में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। जिसमें 6 सितंबर को शक्ति जिला मुख्यालय के शासकीय विश्राम ग्रह में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान जहां जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति की अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गबेल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 23 मई 2013 को हुये झीरम नरसंहार जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 नेताओं की हत्या हुई थी। इस मामले में एनआईए कोर्ट का फैसला आया है। यह आधा अधूरा न्याय है। हम अदालत के फैसले का आदर करते है। अदालत ने वही फैसला दिया है जो एनआईए ने तथ्य अदालत के सामने रखे थे। कांग्रेस जिला बेचने कहा कि एनआईए की जांच शुरू से दिशाहीन रही है।
एनआईए ने घटना के राजनैतिक ‘ड़ियंत्रों के पहलू की जांच नहीं किया था।जिन 10 लोगों की एनआइए ने गिरफ्तारी किया था और जिनको दोषी पाया गया है वे छोटे नक्सली थे। इतनी बड़ी घटना बिना बड़े नक्सली नेताओं के संभव नहीं था। एनआईए ने बड़े नक्सली नेताओं का नाम शुरू के एफआईआर में शामिल किया था बाद में उसको हटा दिया।इस फैसले से घटना की साजिश का पर्दाफाश”। नहीं हुआ है। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाया गया था?यात्रा के मार्ग को किसने, क्यों बदलवाया था? हमले की योजना किसने बनाया गया था?जब-जब बड़े नक्सलियों ने समर्पण किया तब सरकार ने दावा किया कि यह झीरम हमले में शामिल थे। एनआईए ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं किया?घटना के प्रत्यक्ष दर्शइयो जो कि घायल भी थे उनमें से कितनों से एनआईए ने पूछताछ किया?झीरम हमले के दौरान घायल और जीवित बचे पीड़ितों का बयान तक नहीं लिया गया, कई बार प्रभावितों ने जांच एजेंसियो के समक्ष शपथ पत्र के साथ हाजिर हुए लेकिन उनके बयान शामिल ही नहीं किये गये। हत्याकांड के हफ्तों बाद भी शहीदों और घायलों के पर्स, फाईले, महत्वपूर्ण दस्तावेज बिखरे पड़े रहे, किसी का भी मोबाईल जप्त नहीं किया गया।
*कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गबेल ने पत्रकारों को बताया कि एनआईए ने छत्तीसगढ़ सरकार की पुलिस क द्वारा गठित एसआईटी को जांच से क्यों रोका?एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी नक्सल से कब पूछताछ किया?बड़े नक्सली नेताओं के नाम क्यों हटे?शुरूआत में एनआईए की एफआईआर में दो प्रमुख नक्सली नेता गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) एवं रमन्ना का भी नाम था।21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, फिर चार्ज शीट से उनका नाम क्यों हटाया गया?
अगस्त 2014 तक इनका नाम था लेकिन सितंबर 2014 में जो अदालत में प्रारंभिक चार्जशीट तथा अंतिम चार्ज शीट में उनका नाम हटा दिया गया। यह क्यों हुआ इनका नाम क्यों हटाया गया?एनआईए की शुरूआती जांच में देवा (बार से सुक्का एलियास देवा) का नाम झीरम में शामिल नक्सलियों में था, एनआईए को वांछित भी घोषित किया था, उस पर ईनाम भी घोषित था, फिर उससे पूछताछ क्यों नही हुई?एनआईए ने जिन 26 लोगों को नामजद कर फरार घोषित किया था, उसमें बसवराजू, गणेश ऊइके, रूपेश ऊर्फ संजीव, सुरेन्द्र ऊर्फ रामचंद्र रेड्डी, जयदेव उर्फ बड्डा देव, सोनू उर्फ भूपति के नाम थे, इनमे से अनेको ने आत्मसमर्पण किया है। एनआईए ने उनसे पूछताछ कब किया? क्या वे उन्हें एनआईए ने निर्दोष मान लिया है।झीरम में शामिल सरेंडर नक्सलियों से कब पूछताछ हुई।झीरम घाटी हत्याकांड (दरभा घाटी हमला) में शामिल और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) व पुलिस द्वारा वांछित / फरार घोषित कई प्रमुख नक्सलियों ने समय-समय पर पुलिस एवं सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया है।इनमें से प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं चैतू उर्फ श्याम दादा (DKSZC सदस्य) इनामः 25 लाख रू.भूमिकाः दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का वरिष्ठ सदस्य और झीरम घाटी हमले की साजिश रचने व दरभा डिवीजन को संचालित करने का मुख्य सूत्रधार / मास्टरमाइंड ।इन्होंने अपने 9 अन्य कैडर सहयोगियों (जैसे सरोज उर्फ मलकु सोढ़ी, भूपेश फुरामी आदि) के साथ बस्तर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी (केंद्रीय समिति सदस्य / नक्सली कमांडर) भूमिकारू माओवादी संगठन के शीर्ष कमांडरों में शामिल। सरेंडर के बाद इन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि झीरम घाटी नरसंहार संगठन की एक बड़ी गलती और नीतिगत विफलता थी।निर्मला उर्फ सुमित्रा (महिला कैडर) इनामः 20 लाख रू भूमिकाः झीरम घाटी हमले की घटना के दौरान अग्रिम मोर्चे और लॉजिस्टिक सपोर्ट में सक्रिय रही इस इनामी महिला नक्सली ने बस्तर में सुरक्षा बलों के समक्ष सरेंडर किया। 1 करोड़ के ईनामी (केंद्रीय और अलग-अलग राज्यों की एजेंसियों द्वारा संयुक्त) भूपति उर्फ सोनू दादा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में गढ़चिढ़ौली में समर्पण किया।केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता ने सितंबर 2025 में तेलंगाना म समर्पण किया इस पर छत्तीसगढ़ ने 40 लाख और तेलंगाना ने 25 लाख का ईनाम घोषित था।इनसे पुछताछ क्यों नहीं किया गया, अभियोजित क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस शक्ति जिले की अध्यक्ष श्रीमती रश्मि गबेल ने कहा किभाजपा नहीं चाहती झीरम का सच सामने आये।झीरम मामले में भाजपा की तत्कालीन सरकार शुरू से संदिग्ध रही है। भाजपा ने इस मामले की जांच को रोकने की दिशा को भटकाने का हर संभव प्रयास किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक ने न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लेकर आये थे। कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी का गठन किया तो एनआईए जांच रोकने स्टे लेकर आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी को जांच के पक्ष में फैसला दिया तो ढाई साल में साय सरकार ने जांच नहीं शुरू किया। भाजपा नहीं चाहती झीरम का सच सामने आये। एनआईए की जांच और कार्य प्रणाली से भी यही साबित हुआ है।घटना के वक्त भी सरकार व नक्सली में साठ-गांठ था और आज फैसला आने के बाद भी बड़े नक्सली लीडरों को एनआईए ने बचाया गया है तो सरकार व एनआईए का नक्सलियों से साठ-गांठ का स्पष्ट प्रमाण है। शासकीय विश्राम गृह शक्ति में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति के महामंत्री एवं एडवोकेट गिरधर जायसवाल। जिला किसान कांग्रेस कमेटी शक्ति के अध्यक्ष साधेश्वर कुमार गबेल।पंडित बलराम प्रसाद पांडे। जागेश्वर सिंह राज। वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्र कुमार सोनी। कालू रघुनाथ अग्रवाल।जिला कांग्रेस कमेटी शक्ति के अन्य पदाधिकारी सदस्य एवं विभिन्न मोर्चा प्रकोष्ठों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे तथा कांग्रेस पार्टी ने झीरम के इस फैसले को आधा अधूरा न्याय बताया.







