टूट के बाद भी नरम नहीं हुए ममता के तेवर, अभिषेक पर जताया भरोसा, केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही मीटिंग में पहुंचे. शुक्रवार को ममता के घर पर आयोजित थी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक. 20 सांसद भी टीएमसी से बगावत के मूड में

पश्चिम बंगाल में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी

टूट के बाद भी नरम नहीं हुए ममता के तेवर, अभिषेक पर जताया भरोसा, केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही मीटिंग में पहुंचे

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह और बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बैठक बुलाई. बैठक में 8 विधायक और 6 सांसदों की उपस्थिति के बावजूद ममता ने अभिषेक बनर्जी पर भरोसा जताया और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया. पार्टी ने नए नेतृत्व की घोषणा करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को चुनौती देने और भाजपा के खिलाफ सड़क व कोर्ट में लड़ने का संकल्प लिया. विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस टूट की कगार पर खड़ी है. शुक्रवार को ममता बनर्जी ने पार्टी में बगावत के बीच विधायकों, सांसदों और पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई, लेकिन बैठक में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से केवल आठ विधायक और चार सांसद ही पहुंचे. वहीं, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पार्टी नेताओं में असंतोष के बावजूद पार्टी ने उन पर ही भरोसा जताया.पार्टी की बैठक में अभिषेक बनर्जी के फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया, हालांकि डोला सेन और डेरेक ओ ब्रायन उनकी मदद करेंगे और ममता पार्टी की चेयरपर्सन बनी रहेंगी. चंद्रिमा भट्टाचार्य को तृणमूल पश्चिम बंगाल का अध्यक्ष बनाया गया है. माला रॉय महिला तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं. वहीं, सयानी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है.प्रियंका चौधरी को स्टूडेंट काउंसिल का प्रेसिडेंट बनाया गया है और तृणमूल ट्रेड यूनियन का अध्यक्ष मलय घटक बनाया गया है.कुणाल घोष को पार्टी का राज्य प्रवक्ता और सांसद कल्याण बनर्जी और डेरेक ओर ब्रायन को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है.

बैठक में पहुंचे केवल 8 विधायक और छह सांसद

पार्टी की बैठक में 8 विधायक और 6 सांसद ममता बनर्जी के घर पहुंचे. विधायकों में बीना मंडल, आशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, सोभनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब शामिल थे, जबकि सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल थे.हालांकि बाद में टीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक थी. सभी सांसद और विधायक इसके सदस्य नहीं हैं. बैठक में महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी जैसे कई सांसद जो राष्ट्रीय कार्यसमिति के हिस्सा हैं, वर्चुअली शामिल हुए थे.बैठक के बाद सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, “… हमने तय किया है कि स्पीकर की ओर से नियुक्त विपक्ष के नेता का पद गैर-कानूनी है. हम इसके खिलाफ सोमवार को कोर्ट जाएंगे. हम हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगें।उन्होंने आगे कहा, “भाजपा जिस तरह से टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या कर रही है और उन पर झूठे केस दर्ज कर रही है, हम उसके खिलाफ लड़ेंगे. हम सड़कों पर भी लड़ेंगे और कोर्ट में भी.”

बगावत के बीच एक्शन में ममता

बता दें कि विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद टीएमसी में बगावत शुरू हो गयी है. 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है और विधानसभा अध्यक्ष ने उनको मान्यता भी दे दी है. पराजय के बाद विधायकों की तर्ज पर सांसदों में भी बगावत शुरू हो गयी है. दावा है कि टीएमसी के 20 सांसद बगावत कर सकते हैं. इस बीच, ममता बनर्जी ने डैमेज कंट्रोल शुरू किया है और पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली है और पार्टी संगठन में फेरबदल की है.पार्टी के विधायक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन ममता ने अभिषेक को पार्टी का नेशनल जनरल सेक्रेटरी बनाए रखा. राजनीनितक विश्लेषकों का कहना है कि मुश्किल हालात में भी अभिषेक बनर्जी को पद पर बनाए रखकर ममता बनर्जी एक बार फिर यह साबित करना चाहती हैं कि उनका अपना रास्ता ही सही है.हालांकि, अभिषेक के साथ-साथ डोला और डेरेक को भी ऑल इंडिया जॉइंट जनरल सेक्रेटरी बनाया गया है. कुणाल घोष का कहना है कि हमारे ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी का काम का बोझ बहुत बढ़ रहा है. इसलिए, उनकी मदद के लिए हमारी नेशनल वर्किंग कमेटी से दो और जॉइंट सेक्रेटरी बनाए गए हैं.