डिम्पल अग्रवाल को मिली पीएचडी की उपाधि “आदिवासी एवं गैर आदिवासी महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण” पर किया शोध. खरसिया शहर की मेधावी बेटी एवं कटघोरा के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार की बहू है डिंपल. शासकीय महाविद्यालय चपले में सहायक प्रोफेसर है डिंपल

डिम्पल अग्रवाल को मिली पीएचडी की उपाधि "आदिवासी एवं गैर आदिवासी महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण" पर किया शोध. खरसिया शहर की मेधावी बेटी एवं कटघोरा के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार की बहू है डिंपल. शासकीय महाविद्यालय चपले में सहायक प्रोफेसर है डिंपल kshititech
प्रोफेसर डॉक्टर श्रीमती डिंपल अग्रवाल
डिम्पल अग्रवाल को मिली पीएचडी की उपाधि "आदिवासी एवं गैर आदिवासी महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण" पर किया शोध. खरसिया शहर की मेधावी बेटी एवं कटघोरा के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार की बहू है डिंपल. शासकीय महाविद्यालय चपले में सहायक प्रोफेसर है डिंपल kshititech
श्रीमती डिंपल अग्रवाल को मिली पीएचडी की उपाधि

डिम्पल अग्रवाल को मिली पीएचडी की उपाधि “आदिवासी एवं गैर आदिवासी महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण” पर किया शोध. खरसिया शहर की मेधावी बेटी एवं कटघोरा के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार की बहू है डिंपल

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -खरसिया जिला रायगढ़ की निवासी डिम्पल अग्रवाल और वर्तमान में नवीन शासकीय महाविद्यालय चपले में पदस्थ वाणिज्य की प्रोफेसर ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग छत्तीसगढ़ से पीएचडी ( डॉ ऑफ फिलासफी) का शोध कार्य पूर्ण किया विगत 15 मई 2026 को आयोजित मुख्य परीक्षा में उज्जैन के प्रसिद्ध विषय विशेषज्ञ डॉक्टर शैलेंद्र कुमार भारहत स्वयं उपस्थित हुए उन्होंने डिम्पल अग्रवाल की पीपीटी और महिलाओं के सशक्तिकरण पर जो कार्य किया है उसकी खूब प्रशंसा करते हुए उन्हें अंत में डॉक्टर की उपाधि प्रदान करने की अंतिम अनुशंसा की |उन्होंने यह शोध कार्य डॉ.सुनील कुमार श्रीवास्तव सहायक प्राध्यापक वाणिज्य शोध केंद्र श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी भिलाई के निर्देशन में संपन्न किया| डॉ डिम्पल अग्रवाल के शोध का उद्देश्य आदिवासी एवं गैर आदिवासी महिलाओं की स्थिति को उजागर करना था| आदिवासी महिलाएं जो समाज में अभी भी पिछड़े हैं उनको व्यवसाय के लिए प्रोत्साहित कर उनको समाज में समान दर्जा देना था, उनके इस शोध में महिलाओं की जो समस्याएं हैं उस पर भी इन्होंने बताया है और यह कहा कि इस शोध से महिलाओं में व्यवसाय के लिए मनोबल बढ़ेगा जिससे वे अपने आर्थिक स्थिति को सुधार सकती है|

गोल्ड मैडलिस्ट से प्रोफेसर बनने तक का सफर

खरसिया की निवासी डॉक्टर डिम्पल अग्रवाल की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर खरसिया से एवं महाविद्यालयीन शिक्षा कन्या कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय खरसिया से संपन्न हुई वर्ष 2010 में दसवीं में 88% अर्जित कर स्कूल में अपना स्थान बनाया वहीं 2015 में 75% अर्जित कर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में सातवां स्थान बनाया इन्हें इस उपलब्धि के लिए महाविद्यालय में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जा चुका है |इतना ही नहीं इन्होंने net की परीक्षा के साथ ही cg set की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ( psc) द्वारा आयोजित 2019 की परीक्षा में पूरे छत्तीसगढ़ में 14 वा स्थान प्राप्त किया| डॉ. डिम्पल अग्रवाल प्रारंभ से ही मेधावी छात्रा रही है | प्रारंभिक समय में इनके माता – पिता ने इन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया| इसके बाद इनका विवाह कटघोरा व्यापारी राजन अग्रवाल के साथ हुआ,विवाह के पश्चात भी इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और डॉक्टर बनने तक के सफर में हमेशा पति का साथ रहा | यह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता पति राजन अग्रवाल एवं अपने सास ससुर को देती है इनके पति राजन अग्रवाल ने इनकी इस उपलब्धि में अमूल्य समय दिया यह अपना विशिष्ट श्रेय अपने पति राजन अग्रवाल को देती है |

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